Transcript
[0:00] आज हमारा आध्यात्मिक मंच शोभायमान है।
[0:03] हमारे विशिष्ट अतिथियों से सुसज्जित है।
[0:06] इससे पहले कि हम इस वार्तालाप को आगे
[0:10] बढ़ाएं।
[0:12] शैलेश जी
[0:17] आदरणीय गुरुदेव जी के चरणों में वंदन।
[0:21] मैं
[0:24] मां सीता की धरती से आया हूं।
[0:27] और मैं स्वयं नहीं आया हूं।
[0:30] अपने मार्गदर्शक अपने मुखिया माननीय
[0:34] मुख्यमंत्री आदरणीय श्री सम्राट चौधरी जी
[0:37] के नेतृत्व में आपके सानिध्य में आया हूं।
[0:39] अभिनंदन स्वीकार करें गुरुदेव।
[0:46] साधना के धरा पर मां सीता की धरती से आए
[0:50] हुए हम सब साहित्य लेकर आए हैं।
[0:54] अभिनंदन और अब माननीय मुख्यमंत्री महोदय
[1:01] स्मृति चिन्ह भेंट करेंगे
[1:05] और मखाना का यह माला
[1:08] गुरुदेव जी आदरणीय गुरुदेव को तरतल ध्वनि
[1:12] से तालियां बिहार की पहचान
[1:15] हमारे मिथिलांचल का मान
[1:20] अंग वस्त्र भेंट की जा रही है और साथ ही
[1:24] साथ
[1:25] बुद्ध की वह एक विशेष स्मृति चिन्ह
[1:29] लाई जाए
[1:31] भगवान बुद्ध की स्मृति चिन्ह जो विशेष तौर
[1:35] पर
[1:36] गुरुदेव के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी के
[1:39] द्वारा लाया गया है और मंच पर
[1:44] हम हृदय से अभिनंदन लेकर आए हैं। हम बिहार
[1:49] की धरा लेकर आए हैं। हम बिहार की माटी
[1:52] लेकर आए हैं। हम बिहार की खुशबू लेकर आए
[1:55] हैं। हम महावीर के धरती से आए हैं। हम
[1:57] बुद्ध के धरती से आए हैं और भगवान बुद्ध
[2:00] की ये विशेष स्मृति चिन्ह गुरुदेव को
[2:02] समर्पित करतल ध्वनि से एक बार तालियां हम
[2:05] सब समर्पित करें। [प्रशंसा]
[2:09] बहुत-बहुत आभार आश्रय ग्रहण किया जाए।
[2:13] मैं बताता चलूं कि गुरुदेव के सानिध्य में
[2:17] माननीय मुख्यमंत्री बिहार आदरणीय श्री
[2:20] सम्राट चौधरी जी एक बार हम सब अभिनंदन
[2:22] करें। माननीय मुख्यमंत्री महोदय का
[2:26] साथ ही साथ हमारे बीच मंच पर हैं माननीय
[2:30] विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर प्रेम कुमार जी
[2:33] एक बार स्वागत [प्रशंसा]
[2:36] हमारे बीच मंच पर मौजूद हैं श्री संजय
[2:39] सरावगी प्रदेश अध्यक्ष बिहार भारतीय जनता
[2:42] पार्टी अभिनंदन
[2:45] साथ ही साथ श्री मोहम्मद जमा खान जी
[2:48] माननीय मंत्री अल्पसंख्यक कला विभाग बिहार
[2:51] सरकार
[3:01] सभी के अभिनंदन के साथ अब मैं आग्रह
[3:06] करूंगा कि आदरणीय गुरु जी के मार्गदर्शन
[3:09] में माननीय मुख्यमंत्री समेत तमाम
[3:11] गणमान्यमान अतिथि जो मंचासीन है आपसे
[3:14] आग्रह है दीप प्रज्वलित कर इस विशेष बिहार
[3:17] महोत्सव के उद्घाटन करने की कृपा करें। मे
[3:21] आई रिक्वेस्ट गुरुदेव एंड ऑल आवर एस्टीम
[3:23] डिग्नेटरीज टू काइंडली पार्टिसिपेट इन द
[3:26] ट्रेडिशनल लाइट लाइटिंग सेरेमनी
[3:38] [प्रशंसा]
[3:40] ऐतिहासिक क्षण है
[3:44] दीप शपथ का प्रतीक दीप प्रकाश का प्रतीक
[3:49] दीप
[3:51] ऊंचाइयों की ओर जाने का प्रतीक
[3:54] और दीप इस बात का प्रतीक कि बिहार महोत्सव
[3:58] की शुरुआत हो चुकी है। बिहार महोत्सव 2026
[4:02] कला एवं संस्कृति विभाग पर्यटन विभाग एवं
[4:05] उद्धव विभाग तथा आर्ट ऑफ लिविंग बिहार के
[4:08] तत्वाधान में आयोजित
[4:11] आदरणीय गुरुदेव के सानिध्य में समर्पित
[4:15] ऐतिहासिक क्षण है। एक बार हम चाहेंगे
[4:17] बिहार के लिए आप सब तालियां करतल ध्वनि से
[4:19] बजाएं। हम बिहारियों का मन गर्व से ऊंचा
[4:22] हो जाएगा।
[4:30] हम उस धरा से आए हैं जो लोकतंत्र की पहली
[4:33] धरती है। हम उस धरा से आए हैं जहां पर इस
[4:37] भारत के पहले राष्ट्रपति होने का गौरव
[4:40] प्राप्त किया और हमें सौभाग्य प्राप्त हुआ
[4:42] है कि आज गुरुदेव जी के सानिध्य में हम सब
[4:45] इस बिहार महोत्सव को समर्पित कर रहे हैं।
[4:48] आइए बिहार के विशेष संस्कृति हम लेकर आपके
[4:53] बीच आए हैं और वह संस्कृति जो होली से
[4:56] लेकर चयता से लेकर दिवाली तक और छठ के जब
[5:00] गीत बजाए जाते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते
[5:03] हैं। हम ठेकुआ भी लेकर आए हैं। हम वो तमाम
[5:06] रंग लेकर आए हैं। बिहार की विरासत, बिहार
[5:10] की माटी, बिहार की खुशबू और उसको पिरोया
[5:12] है बिहार गौरव गान में। बिहार गौरवगान
[5:16] हमारी माटी की संस्कृति आदरणीय गुरुदेव के
[5:19] चरणों में समर्पित है। और गौरवगान आइए हम
[5:23] सब देखते हैं और बिहार को जानते हैं कि
[5:26] बिहार क्या है? बिहार कैसा है? और बिहार
[5:29] को हमें किस प्रकार से अपनाना चाहिए।
[5:31] बिहार गौरव गान
[5:56] बिहार की तमाम संस्कृतियों को लेकर
[6:00] तमाम गाथाओं को लेकर बिहार गौरवगान
[6:06] आप जब इसे देखेंगे तो बिहार की मिट्टी को
[6:10] बहुत नजदीक से आप जान पाएंगे।
[6:16] राष्ट्रकवि दिनकर की धरती फनीश्वर नाथ
[6:20] रेणु की धरती सम्राट अशोक की धरती महावीर
[6:25] की धरती भगवान बुद्ध की धरती यह है बिहार
[6:30] और आज हम सब बिहारी माननीय मुख्यमंत्री के
[6:33] मार्गदर्शन में यहां इस प्रांगण में मौजूद
[6:36] हैं। गौरवान्वित हैं। गर्व का फल है, गर्व
[6:40] का क्षण है। इसीलिए हम बिहार गौरव गान
[6:43] प्रस्तुत कर रहे हैं। आइए बिहार गौरव गान
[6:47] की प्रस्तुति।
[7:07] चलता [संगीत] सूरज नई जवानी
[7:12] लहू लहू में नई रवानी [संगीत]
[7:17] भरों की जो दरिया का पानी [संगीत] करुणाई
[7:21] की नई कहानी सपनों को आकाश बनाओ जनजन में
[7:26] विश्वास जगाओ
[7:27] [संगीत]
[7:27] वक्त पसारे बैठा है
[7:32] नया इतिहास बनाओ
[7:42] [संगीत]
[7:45] ओ देश की जवानियों
[7:47] चलो उठो उठो
[7:49] इतिहास की निशानियों
[7:51] चलो उठो उठो
[7:52] ओ खून की रवाियों [संगीत]
[7:54] चलो उठो उठो
[7:56] संघर्ष की कहानियों
[7:58] चलो उठो उठो
[8:11] आनो
[8:16] [संगीत]
[8:18] [गाना गाने की आवाज़]
[8:25] आ
[8:27] करो
[8:33] आ
[8:35] [गाना गाने की आवाज़]
[8:44] [संगीत]
[8:47] [गाना गाने की आवाज़]
[8:55] ओ
[9:06] आ हो
[9:17] [संगीत]
[9:23] [संगीत]
[9:33] [संगीत]
[9:39] दिशा दिशा में लोक रंग का तारतार
[9:46] है
[9:48] [संगीत]
[9:49] दिशा दिशा में लोक रंग का तारतार है महका
[9:54] महका सौधी [संगीत] माटी का बिहार है
[9:59] दिशा दिशा में लोक रंग का तारतार
[10:06] है
[10:09] महंगा महंगा सो माटी का विहार है
[10:19] महंगा [संगीत]
[10:20] महंगा सो माटी का विहार है
[10:29] दिशा [संगीत]
[10:29] दिशा में लोक रंग का तारतार [संगीत] है
[10:39] दिशा दिशा में लोक रंग का तारतार
[10:45] है [संगीत]
[10:48] महका महका सोने माटी [संगीत]
[10:53] का विहार है
[10:57] [संगीत]
[10:58] महंगा महंगा सोने माटी का विहार है
[11:17] [संगीत]
[11:23] भारत भूखे मान चित्र का जो उतारा
[11:27] वही जहां पर [संगीत] लोकतंत्र की पहली
[11:30] धारा
[11:33] अंबिका
[11:35] केूप
[11:37] की गूंज अभी तक
[11:42] बोल रही है कानों में मीठी रसधारा
[11:53] मा
[11:55] रे सा
[12:02] प्रिय अशोक का स्तंभ बना एक यादगार है
[12:07] महका महका सौधी माटी का बिहार है [संगीत]
[12:12] प्रिय अशोक का स्तंभ बना एक यादगार
[12:19] है
[12:22] महंगा महका [गाना गाने की आवाज़]
[12:24] सो माटी [संगीत] का विहार है।
[12:32] महका महका सो माटी का विहार है।
[12:41] सा गा
[12:43] [संगीत][गाना गाने की आवाज़]
[12:44] सा गा
[12:46] सा धा नी धा [संगीत] नी धा प सा नी धा नी
[12:50] धा सा
[12:54] [संगीत]
[12:56] रंग रंग के फूलों से आज चमन महका है। लहर
[13:01] लहर आज मिली गंगा की गोद में। उत्तर से
[13:06] दक्षिण से पूरब से पश्चिम [संगीत] से 100
[13:09] किरणें मिली है आज एक ज्योत में।
[13:14] कला पुंज देख देख आंखें निहाल [संगीत] है
[13:18] अभिनंदन करने को का गुलाल है
[13:24] [संगीत] गूंज में आ उल के अफसाने
[13:35] [संगीत]
[13:44] कहीं गूंजते आधा उगल के अफसाने
[13:49] कजरी [संगीत] झूमर और भगवा के मस्त तराने
[13:53] अरे बंगला में उड़ाता गुलाल अरे लाला बंगला
[13:59] में उड़ाता गुलाल हो बाबू
[14:04] आ बाबू कुंवर सिंह तेवा बहादुर बंगला में
[14:10] उड़ता गुलाल रे लाला में उड़ता [संगीत]
[14:14] गुलाल हो बाबू आ बाबू कुमार सिंवा बहादुर
[14:22] बंगला में उड़ता गुलाल रे लाला में उड़ता
[14:26] [संगीत]
[14:26] गुलाल हो बाबू
[14:30] बाबू कुारा सिंवा बहादुर
[14:34] में उड़ा उड़ाता गुलाल अरे लाला में उड़ता
[14:39] गुलाल हो बाबू आ बाबू कुंवर सिंह तेवा
[14:45] बहादुर बंगला में उड़ता गुलाल रे लाला में
[14:50] उड़ता गुलाल हो बाबू आ बाबू कुरा सिंवा
[14:57] बहारी बंगला में उड़ता गुलाल अरे लाला में
[15:02] उड़ता गुलाल
[15:05] है
[15:07] [संगीत]
[15:08] गूंज पे आ उल के अफसाने [संगीत]
[15:12] कजरी झूमर और भगवा के मस्त तराले
[15:18] चौपालों में सैता घाटों
[15:22] की बहार है
[15:27] रामा [चीखने की आवाज़]
[15:29] रामा बाबा घर रहती है [संगीत] रामा
[15:35] घर
[15:39] रामा [संगीत] सया घरवाला
[15:44] दूल्हा आए रामा सया [संगीत] घरवाला
[15:50] दूल्हा आए रामा [संगीत]
[15:53] सया घरवा मोरी रामा रामा हो राम बाबा घर
[16:02] रामा बाबा
[16:07] रामा सया घरवाला
[16:12] रामा सयावाला
[16:18] रामा सयावा
[16:26] की जय
[16:30] चौलों [संगीत] में घाटों की बहार है महका
[16:35] महका सोनी [संगीत] माटी का विहार है
[16:40] जो पारों में जैसा घाटों की बहार है
[16:50] महका महका सो माटी का विहार है
[16:59] महका महका [संगीत]
[17:03] माटी का विहार [संगीत] है।
[17:10] [संगीत]
[17:18] [संगीत]
[17:29] सामा चाको साला का खेल अनूठा [संगीत]
[17:33] छठ मैया के गीतों से गंगा तट गूंजा
[17:38] [संगीत]
[17:39] चार पहर हम जलधर सेला
[17:44] चार पहर [संगीत][गाना गाने की आवाज़]
[17:45] हम घर से
[17:50] चरण तोहार है दीनानाथ
[17:54] दर्शन देह ना पान हे दीनानाथ [संगीत]
[17:58] दर्शन देह ना पान हे दीनानाथ
[18:02] [संगीत][गाना गाने की आवाज़]
[18:03] दर्शन दे ना
[18:08] सामा चाको सा [संगीत] मिथिला का खेल अनूठा
[18:13] छठ मैया के गीतों से गंगा तट गूंजा
[18:18] अंग देश में सती बिहला [संगीत] की पुकार
[18:21] है महका महका सौधी [संगीत] माटी का विहार
[18:26] है
[18:28] अंग देश में सत्य बेला के पुकार है
[18:37] [संगीत]
[18:38] महका महका सो माटी [संगीत] का विहार है
[18:48] महंगा महंगा
[18:51] माहार
[18:54] है
[18:57] बुद्धम शरणम गच्छामि [संगीत]
[19:02] धमम शरणम गच्छामि [संगीत]
[19:07] संघम शरणम गच्छामि
[19:12] बुद्धम शरणम
[19:14] [संगीत]
[19:15] गच्छामि
[19:17] महावीर के चरणों से पावन वैशाली
[19:22] तपो [संगीत] पूत है बोध वृक्ष की डाली
[19:25] डाली
[19:27] महावीर के चरणों से पावन [संगीत] वैशाली
[19:32] तपोपूत है बोध वृक्ष की डाली डाली
[19:37] गुरु वाणी का मंत्र हृदय के आर पार
[19:47] अवल अल्लाहू
[19:51] पाया [गाना गाने की आवाज़]
[19:53] कुदरत ने सब बंदे [संगीत]
[19:55] [गाना गाने की आवाज़]
[19:57] एक नूर
[19:59] सब जग उपजा
[20:02] कौन भले कौन बंदे
[20:07] गुरु वाणी का मंत्र हृदय के आर पार है
[20:15] [संगीत]
[20:16] महका महका सोनी माटी का विहार है
[20:26] महका महका सो माटी का विहार है
[20:41] [संगीत]
[20:45] कुंवर सिंह की कटी [संगीत] बाह गंगा की
[20:49] छाती
[20:50] कीर्ति पका सात जवानों की फहराती [संगीत]
[20:55] कुंवर सिंह की कटी बाह गंगा की छाती
[21:00] [संगीत] कीर्ति पका सात जवानों की फहरा दी
[21:05] अमर शहीदों [संगीत] की यादों का ये मजार
[21:09] है।
[21:10] महका [संगीत] महका सौधी माटी का विहार है।
[21:16] सरफरोशी
[21:17] की [बड़बड़ाने की आवाज़]
[21:18] तमन्ना
[21:20] अब हमारे [गाना गाने की आवाज़]
[21:23] दिल में है।
[21:25] सरफरोशी
[21:27] की [गाना गाने की आवाज़]
[21:28] तमन्ना
[21:30] अब हमारे
[21:33] दिल में है।
[21:35] देखना [गाना गाने की आवाज़] है जोर कितना
[21:40] बाजुए [गाना गाने की आवाज़] कातिल में है
[21:45] देखना है जोर [गाना गाने की आवाज़]
[21:48] कितना
[21:50] बाजुए कातिल
[21:53] में है
[21:55] अमर शहीदों
[21:57] की यादों का ये मजार है
[22:05] महका महका सौंद माटी का बिहार है [संगीत]
[22:14] महका महका सौंद माटी का बिहार [संगीत]
[22:21] है
[22:24] ये जंग है जंग आजादी
[22:30] आजादी के परचम के तले
[22:41] [गाना गाने की आवाज़]
[22:42] [संगीत]
[22:44] देश रत्न राजेंद्र से हुआ मस्तक [संगीत]
[22:47] ऊंचा
[22:49] आजादी का मंत्र यही गांधी ने फूंका
[22:54] देश रत्न राजेंद्र से हुआ मस्तक ऊंचा
[22:57] [संगीत]
[22:59] आजादी का मंत्र यही गांधी ने फूंका
[23:03] जय प्रकाश [संगीत] का सपना सबका एत्वार
[23:07] है।
[23:08] महका महका सो माटी का विहार है।
[23:14] जय प्रकाश का सपना सबका एतबार
[23:20] है।
[23:23] महका महका सौदी माटी का दीवार है।
[23:33] महंगा [गाना गाने की आवाज़]
[23:35] महंगा [संगीत]
[23:35] सो माहार
[23:40] है
[23:47] [संगीत]
[23:51] मनुष्य बस मनुष्य हो दिलों में सिर्फ
[23:54] प्यार हो ना भेद जाति [संगीत] धर्म का ना
[23:56] कोई शर्मसार हो
[23:59] कि तुम वतन के पास चमन के हर शिकार हो
[24:02] भविष्य देश के तुम ही हो भक्त की पुकार हो
[24:06] देश की जवाियों चलो उठो उठो इतिहास की
[24:10] निशानियों चलो उठो उठो ओ भूल की रवाियों
[24:14] चलो उठो [संगीत] उठो संघर्ष की कहानियों
[24:17] चलो उठो उठो चलो उठो उठो चलो उठो उठो
[24:25] ये है हमारी माटी यह है हमारा संस्कार ये
[24:29] है हमारा बिहार
[24:32] [हौसला बढ़ाने की आवाज़]
[24:34] बिहार लेकर आए हैं गुरुदेव
[24:37] और
[24:39] आशीर्वाद की अपेक्षा है। आगे अब समस्त
[24:43] बिहार वासियों की ओर से बहुत-बहुत आभार।
[24:46] बहुत अभिनंदन इस ताली के लिए जब हमारे
[24:48] माननीय मुख्यमंत्री बैठे हैं तो स्वयं
[24:50] आपके बीच चलकर आए हैं और ये पहले
[24:52] मुख्यमंत्री हैं जिनका यहां आना हुआ है।
[24:55] एक बार तालियां माननीय मुख्यमंत्री जी के
[24:57] लिए। [प्रशंसा]
[24:59] बहुत अभिनंदन जी
[25:03] कार्यक्रम को हम आगे बढ़ाएं।
[25:07] मंचासीन सम्मानित विशिष्ट अतिथियों के
[25:11] अलावा हमारे साथ उपस्थित हैं। माननीय
[25:15] विधायक कुम्हार पटना श्री संजय कुमार
[25:18] गुप्ता जी। आपका आर्ट ऑफ लिविंग
[25:21] अंतरराष्ट्रीय केंद्र के प्रांगण में
[25:23] बहुत-बहुत स्वागत है।
[25:26] हमारे साथ उपस्थित हैं माननीय विधायक पटना
[25:30] साहिब से श्री रत्नेश कुमार कुशवाहा जी।
[25:34] हार्दिक अभिनंदन हमारे प्रांगण में।
[25:37] [प्रशंसा]
[25:38] उपस्थित हैं श्री गणेश चौहान जी। माननीय
[25:41] विधायक 40 गांव जलगांव जिला महाराष्ट्र से
[25:46] आपका सादर अभिनंदन। [प्रशंसा]
[25:50] हमारे साथ उपस्थित हैं उड़ीसा के गांधी
[25:52] श्री प्रताप चंद्र सारंगी जी माननीय सांसद
[25:57] लोकसभा बालेश्वर उड़ीसा
[26:00] हम में से कई लोगों ने इन्हें संस्कृत में
[26:03] संसद में वार्तालाप करते सुना होगा
[26:07] और
[26:14] अब
[26:16] गुरुदेव का स्वागत करना चाहेंगे
[26:19] महाराष्ट्र से हमारा आए हुए हमारे अतिथि
[26:22] गण माननीय विधायक श्री मंगेश चौहान जी
[26:27] श्री संजय निकम जी राज्य अध्यक्ष ग्राम
[26:30] विकास अधिकारी
[26:32] श्री संजय पाटिल जी सभापति पंचायत समिति
[26:35] चालीसगांव
[26:37] आइए
[26:41] गुरुदेव का स्वागत करेंगे मंच पर
[27:08] मनीष जी
[27:11] मनीष जी
[27:49] मनीष जी
[27:50] माननीय विधायकैया
[27:55] माननीय अतिथियों की श्रृंखला में उपस्थित
[27:58] हैं माननीय मनीष जी विधायक धौरैया
[28:02] आपका बहुत-बहुत स्वागत हमारे प्रांगण में
[28:06] और मनोज कुमार सदस्य बिहार राज्य खाद्य
[28:09] आयोग पटना के आपका भी हार्दिक अभिनंदन
[28:18] और उपस्थित हैं उदय कुमार सिंह माननीय
[28:22] विधायक शेरघाटी।
[28:25] आपका भी बहुत-बहुत अभिनंदन हमारे प्रांगण
[28:28] में।
[28:39] अब हम
[28:41] ह एमिनेंस डॉक्टर परमेश्वर नाथ मिश्रा
[28:44] एमिनेंस ज्वेलिस्ट इज आल्सो प्रेजेंट विद
[28:46] अस
[28:49] [प्रशंसा]
[29:08] अब हम आमंत्रित करना चाहेंगे
[29:11] बिहार भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश
[29:14] अध्यक्ष
[29:15] उनके आशीर्वचन सुनेंगे हम
[29:21] संजय सरागी जी से
[29:23] वी नाउ हैव द प्रिविलेज ऑफ हियरिंग फ्रॉम
[29:26] आवर डिस्टिंग्विश गेस्ट मे आई इनवाइट श्री
[29:29] संजय सरागी जी ऑनरेबल बिहार स्टेट
[29:33] प्रेसिडेंट बीजेपी टू शेयर अ फ्यू वर्ड्स
[29:35] विद अस।
[29:37] जय गुरुदेव। जय बिहार।
[29:41] परम पूज्य गुरुवर श्री श्री रविशंकर जी के
[29:46] चरणों में मैं समस्त बिहार वासियों की ओर
[29:49] से आपको सादर प्रणाम करता हूं।
[29:56] आज बिहार महोत्सव के अवसर पर स्वयं बिहार
[29:59] के माननीय मुख्यमंत्री आदरणीय श्री सम्राट
[30:02] चौधरी जी मंच पर उपस्थित बिहार विधानसभा
[30:06] के सम्मानित अध्यक्ष प्रेम कुमार जी बिहार
[30:10] सरकार के माननीय मंत्री जमा खान साहब मेरे
[30:15] सामने उपस्थित माननीय सांसद माननीय
[30:18] मुख्यमंत्री जी के साथ आए हुए दर्जनों
[30:20] विधायक और यहां उपस्थित
[30:23] अतिथि गण कलाकार बंधु बहने बिहार के
[30:28] सुपुत्र सुपुत्रियां और आर्ट ऑफ लिविंग
[30:31] परिवार के सभी सदस्यों के मैं बिहार की ओर
[30:34] से आप सभी लोगों का हार्दिक अभिनंदन
[30:37] हार्दिक स्वागत करता हूं।
[30:40] आज बेंगलुरु की बेंगलुरु की इस पावन धरती
[30:43] पर खड़े होकर हृदय भर जाता है। हमें अपनी
[30:47] मातृभूमि से सैकड़ों मील दूर हैं। फिर भी
[30:51] ऐसा लगता है कि मानो गंगा, गंडक, कोसी,
[30:55] बागमती की लहरें यहां बह रही है। क्योंकि
[30:59] बिहार केवल भूगोल नहीं है। बिहार एक भाव
[31:02] है, एक संस्कृति है और एक साधना है। सबसे
[31:06] पहले मैं परम पूज्य गुरुदेव जी का आदरणीय
[31:10] रवि शंकर श्री श्री रविशंकर जी महाराज का
[31:13] हृदय से आभार प्रकट करना चाहता हूं।
[31:16] उन्होंने ना केवल इस आश्रम के द्वार बिहार
[31:20] के लिए खोले बल्कि विश्व के मंच पर बिहार
[31:23] की आत्मा को सम्मान दिया।
[31:26] योग, प्राणायाम और शांति का जो संदेश यहां
[31:29] से जाता है वही संदेश सदियों से नालंदा,
[31:34] विक्रम विक्रमशिला और मिथिला की धरती से
[31:36] निकल रहा है। आज गुरुदेव के सानिध्य में
[31:39] बिहार महोत्सव का आयोजन कोई कार्यक्रम
[31:42] नहीं है। एक तीर्थ है जहां संस्कृति सेवा
[31:46] से मिलती है और परंपरा प्रगति से मिलती
[31:50] है। यह महोत्सव आश्रम की पावन छाया में
[31:53] खिल रहा है और इसमें बिहार सरकार के कला
[31:56] संस्कृति विभाग पर्यटन विभाग और उद्योग
[32:00] विभाग का भी स्नेह और सहयोग माननीय
[32:04] मुख्यमंत्री जी के सानिध्य में मिला है।
[32:07] बिहार वह भूमि है जहां मां सीता का आंगन
[32:10] है। जहां जनक की नगरी ज्ञान का केंद्र है।
[32:14] जहां मधुबनी की रेखा में पूरी सृष्टि बसती
[32:17] है। जहां मखाना खेत से निकलकर विश्व की
[32:21] थाली तक पहुंचता है। जहां छठ घाट पर डूबते
[32:24] हुए सूरज को मां कहा जाता है। बुद्ध ने
[32:27] यहीं धर्मचक्र चलाया। महावीर ने यहीं संयम
[32:31] सिखाया और नालंदा ने पूरी दुनिया को
[32:33] विद्यार्थी कहा। उस बिहार की ओर से आप सभी
[32:37] लोगों का हार्दिक अभिनंदन, हार्दिक
[32:38] स्वागत।
[32:41] अब बिहार माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय
[32:44] नरेंद्र मोदी जी के सानिध्य में माननीय
[32:47] मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी के नेतृत्व
[32:50] में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। अब बिहार
[32:54] कंज्यूमर स्टेट नहीं है। अब बिहार
[32:57] प्रोडक्शन स्टेट की ओर बढ़ रहा है। इस
[32:59] बेंगलुरु की धरती से मैं आह्वान करता हूं।
[33:02] यहां पूरे देश और विश्व के लोग यहां हैं।
[33:04] अब बिहार आप आइए। बिहार में समृद्धि में
[33:08] अपना योगदान दीजिए। वहां उद्योग धंधे
[33:10] खोलिए। हमारी इंडस्ट्री पॉलिसी हो कि सभी
[33:14] पॉलिसी हो आज पूरे विश्व के लोग पूरे देश
[33:17] के लोग बिहार की ओर देख रहे हैं। मैं
[33:20] ज्यादा वक्त नहीं लेते हुए एक बार फिर परम
[33:23] पूज्य गुरु जी के चरणों में शीश नवाते हुए
[33:26] बिहार महोत्सव के लिए गुरु जी ने स्थान
[33:28] दिया। उनके प्रति समस्त बिहार वासियों के
[33:32] के तरफ से प्रणाम निवेदित करते हुए हम लोग
[33:35] आपको आमंत्रित करने आए हैं। आइए बिहार अब
[33:38] बिहार वो बिहार नहीं है। अब बिहार देश का
[33:43] आने वाले समय में समृद्धिशाली बिहारों में
[33:46] से एक होगा। इसीलिए इस बेंगलुरु की धरती
[33:48] से पुनः आप सभी लोगों को नमस्कार प्रणाम
[33:51] और वंदन करते हुए पुनः आपका अभिनंदन और
[33:54] प्रणाम करते हुए मैं सभी को नमस्कार
[33:56] प्रणाम करते हुए अपनी वाणी को विराम देता
[33:58] हूं। जय बिहार
[34:01] जय जयदेव।
[34:05] माननीय आपका बहुत-बहुत धन्यवाद इस
[34:09] ऊर्जावान संबोधन के लिए। अब
[34:22] बहुत-बहुत आभार और अब हम
[34:26] माननीय मुख्यमंत्री आदरणीय श्री सम्राट
[34:29] चौधरी जी से आग्रह करेंगे कि संबोधित
[34:33] करें। लेकिन उसके पहले मैं बता दूं हम सब
[34:36] बिहारवासी
[34:38] इनके मार्गदर्शन में आए हैं। बिहार की कला
[34:41] को लेकर आए हैं। बिहार की धारा को लेकर आए
[34:43] हैं। बिहार की संस्कृति को लेकर आए हैं।
[34:46] और माननीय मुख्यमंत्री के प्रेरणा से ही
[34:49] यह बिहार महोत्सव यहां आयोजित की जा रही
[34:51] है। तो मैं आग्रह करूं।
[34:57] अच्छा करा दे पहले।
[35:00] नृत्य कर रहे हैं।
[35:04] कार्यक्रम यही था लेकिन बीच में आ गए।
[35:06] चलिए कोई बात नहीं क्षमा प्रार्थी होते
[35:08] हुए माननीय मुख्यमंत्री का आदेश है और
[35:10] झिजिया बिहार के प्राचीनतम लोक पद्धति जो
[35:14] लोक संस्कृति के रूप में मंचों पर
[35:16] प्रस्तुत की जाने वाली विधा के रूप में है
[35:18] और नृत्य भाव में है। मां भगवती को मां
[35:23] देवी को हम पूजते हैं क्योंकि मां सीता की
[35:27] धरती से हम आते हैं। जगत जननी मां सीता की
[35:30] ये धरती एक अलौकिक नृत्य लेकर जगदंबा के
[35:33] घर में हाजिरी लगाने आई है। आप भी देखिए,
[35:36] आप भी सराहिए और बिहार में समावेशित हो
[35:39] जाइए। झजिया प्रस्तुत है आपके समक्ष।
[35:53] बहुत-बहुत अभिनंदन। तालियां। बहुत
[36:03] तालियों का समर्थन।
[36:06] इन बेटियों के लिए तालियां
[36:09] और एक पंक्ति मैं अवश्य कहना चाहूंगा कि
[36:13] यह माननीय मुख्यमंत्री जी के सहजता का
[36:15] प्रतीक है कि अपनी बेटियों का ख्याल इस
[36:17] तरह से रखते हैं जिन्हें अपने बोलने से
[36:20] पहले अवसर दिया है। यह हमारे लिए सौभाग्य
[36:22] का विषय है। हम बिहार वासियों के लिए
[36:24] सौभाग्य का विषय है। अब मैं विनम्रता
[36:26] पूर्वक आग्रह करूंगा माननीय मुख्यमंत्री
[36:28] महोदय से कि आप हमें संबोधित करने की कृपा
[36:31] करें। एक बार करतल ध्वनि से तालियां
[36:33] समर्पित कीजिए। एंड नाउ इट इज आवर
[36:35] प्रिविलेज टू इनवाइट दी ऑनरेबल चीफ
[36:38] मिनिस्टर ऑफ बिहार श्री सम्राट चौधरी जी।
[36:41] सर, वी आर ऑनर्ड बाय योर प्रेजेंस। मे आई
[36:44] रिक्वेस्ट यू टू काइंडली एड्रेस दिस
[36:46] गैदरिंग।
[36:48] जय बिहार।
[36:51] जय बिहार।
[36:53] जय। [हौसला बढ़ाने की आवाज़]
[36:54] भारत माता की
[36:56] जय।
[36:57] आज
[37:00] आर्ट ऑफ लिविंग
[37:03] इंटरनेशनल सेंटर
[37:06] बेंगलुरु की सभा में
[37:09] मैं सर्वप्रथम
[37:12] परम पूजनीय गुरुदेव श्री रविशंकर जी को
[37:16] उनके चरणों में नमन करता हूं।
[37:22] इस मंच पर उपस्थित
[37:26] बिहार के
[37:28] विधानसभा के अध्यक्ष
[37:31] डॉ. प्रेम कुमार जी
[37:35] बिहार सरकार के माननीय मंत्री जमा खान
[37:37] साहब
[37:41] हमारे साथी मित्र
[37:45] और माननीय विधायक
[37:48] संजय सरावगी जी
[37:51] यहां पर उपस्थित हमारे सभी माननीय विधायक
[37:54] गण
[37:57] और पूरे भारत
[38:01] और पूरे बिहार के लोग
[38:04] आज श्री श्री रविशंकर जी के इस कार्यक्रम
[38:08] में जहां बिहार महोत्सव मनाने का मौका
[38:13] आदरणीय गुरु जी ने दिया है। एक बार जोरदार
[38:17] ताली बजाकर गुरु जी का स्वागत कीजिए।
[38:20] [प्रशंसा]
[38:20] इस मंच के सामने उपस्थित तमाम
[38:25] भाइयों एवं बहनों,
[38:27] नौजवान साथियों, छोटे-छोटे बच्चे, माताएं
[38:30] बहनों।
[38:32] हां साथियों बिहार महोत्सव के बीच में
[38:35] आपके बीच में आया हूं।
[38:38] और बिहार
[38:40] एक ऐतिहासिक धरती है
[38:43] जो भारत को स्वर्णिम काल देने वाला राज्य
[38:46] भी रहा है।
[38:48] उसकी राजधानी पाटलिपुत्र रहा।
[38:53] मां सीता
[38:55] क्योंकि बिहार का मतलब
[38:58] मां जानकी का जन्म स्थान। अभी उत्तर
[39:02] प्रदेश में आप लोगों ने भव्य राम मंदिर
[39:04] देखा। आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने उसका
[39:07] उद्घाटन किया है। हम जरूर आपको आश्वस्त
[39:10] करते हैं। अभी मैं गुरु जी को बता रहा था
[39:13] कि अगले दो वर्षों में 31 दिसंबर 2028 तक
[39:18] बिहार में भी भव्य मां सीता का मंदिर
[39:22] स्थापित करने का काम करूंगा। साथियों एक
[39:25] बार बोलिए सियावर रामचंद्र की
[39:28] जय।
[39:31] साथियों
[39:34] मैं सर्वप्रथम गुरु जी को
[39:38] बहुत बधाई करता हूं। शुभकामना देता हूं कि
[39:41] 45 वर्ष से अधिक आपने इस संस्था को खड़ा
[39:46] किया।
[39:47] इस फाउंडेशन को आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन
[39:50] की स्थापना
[39:52] आपने 1981 में किया।
[39:56] दुनिया में किसी ने नहीं सोचा होगा।
[39:59] कि अपने शरीर से कोई ठीक हो सकता है। सांस
[40:04] लेना और सांस छोड़ने से दुनिया में किसी
[40:08] ने यह नहीं सोचा होगा कि हम स्वस्थ हो
[40:11] सकते हैं। लेकिन परम पूजनीय गुरु जी श्री
[40:15] श्री रविशंकर जी ने सुदर्शन क्रिया के
[40:19] माध्यम से हमको जीने का रास्ता सिखाया।
[40:22] साथ
[40:24] और मैं तो [प्रशंसा]
[40:28] योग की नगरी से आता हूं।
[40:31] वह योग जहां अंगराज कर्ण का राज हुआ करता
[40:36] था। जिसको अंग प्रदेश कहते हैं।
[40:40] और कई साथी अभी यहां पर हैं माननीय सांसद
[40:43] उड़ीसा से। हम तीनों एक हुआ करते एक जमाने
[40:46] में बंगाल, बिहार
[40:49] और उड़ीसा
[40:52] अंग, बंग और कलिंग ये तीनों मिलकर रहते थे
[40:56] और अंग प्रदेश का जो स्वरूप था वही धरती
[41:00] जिस जिले से मैं आता हूं मुंगेर जिले से
[41:03] वहां योग का केंद्र है। और दुनिया को योग
[41:08] सिखाने
[41:10] आज देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र
[41:13] मोदी जी ने
[41:15] परम पूजनीय गुरु जी के मार्गदर्शन में और
[41:19] कई भारत के गुरुओं के आशीर्वाद से आज देश
[41:23] और दुनिया में सबको योग के माध्यम से जीने
[41:28] का रास्ता सिखाया। उसी मुंगेर की धरती से
[41:32] मैं आता हूं जहां योग की उत्पत्ति हुई।
[41:35] साथियों
[41:37] और मेरे जीवन की
[41:41] मैं जब सवेरे लगभग 27 28 से बिहार की
[41:45] राजनीति में काम कर रहा हूं और मैंने जो
[41:49] महसूस किया
[41:51] क्योंकि राजनेता के पास अपना कोई जीवन
[41:54] नहीं होता है सुबह भी काम करना है, रात
[41:57] में भी काम करना है, दोपहर में भी काम
[42:00] करना है।
[42:02] और रात भर जगकर
[42:05] बिहार की जनता को आगे ले जाना है। बिहार
[42:09] जब मैं पहली बार आया था सदन में आज से 27
[42:12] साल पहले साथियों
[42:15] ठीक कहा संजय सरावगी जी ने बिहार पिछड़ा
[42:18] हुआ था। बिहार का मात्र 6000 करोड़ का बजट
[42:23] था। साथियों
[42:24] मैंने देखा वह बदलता हुआ दौर
[42:28] देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व
[42:31] में
[42:32] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
[42:35] जी के नेतृत्व में बिहार बदला और मैंने जो
[42:39] 6000 करोड़ का बिहार देखा था आज मैं गर्व
[42:43] से कह सकता हूं कि मैं 2024 में वित्त
[42:47] मंत्री भी था। उपमुखमंत्री के तौर पर
[42:50] बिहार में काम किया दो-दो बार।
[42:54] मैं जब 2024 में बजट पेश कर रहा था,
[42:58] झारखंड हमसे बटे
[43:00] तो हम लोगों को बहुत पीड़ा हुई थी। जब
[43:04] 2000 में श्रद्धय अटल बिहारी वाजपेई जी ने
[43:06] कहा कि हम आदिवासी समाज के कल्याण के लिए
[43:12] हम झारखंड को अलग करेंगे। तो हम लोगों को
[43:16] पीड़ा हो रही थी। लेकिन लग रहा था कि जो
[43:19] अंतिम पंक्ति में बैठने वाला समाज है अटल
[43:22] जी उसको मुख्यधारा में ला रहे हैं। लेकिन
[43:25] पीड़ा इसलिए था कि जब बिहार बटा था तो 87%
[43:31] रेवेन्यू झारखंड से आता था और 13%
[43:35] रेवेन्यू बिहार से आता था। हमारे पास कुछ
[43:38] नहीं था। बाढ़, सुखाड़, बालू यही थे।
[43:43] लेकिन मैं धन्यवाद देता हूं प्रधानमंत्री
[43:45] जी को। नीतीश जी को जिन्होंने 6000 करोड़
[43:50] के बजट को खड़ा किया और मेरे से 1 घंटा
[43:54] पहले झारखंड सरकार बजट पेश कर रही थी जो
[43:57] हमारा भाई है उसका बजट 1 लाख 39000 करोड़
[44:03] था और मैं बजट पेश कर रहा था जिसके पास
[44:07] मात्र 13% रेवेन्यू था उस बिहार में 37000
[44:13] करोड़ का बजट पेश कर रहा था
[44:16] और आगे भी
[44:18] परम पूजनीय गुरु जी के माध्यम से पूरे
[44:22] बिहार वासियों को जो बिहार 14 करोड़
[44:26] बिहारी है जो देश और दुनिया में परिश्रम
[44:29] के लिए जाने जाते हैं निर्माण के लिए जाने
[44:32] जाते हैं और हम दूसरे को सीते भी हैं
[44:36] क्योंकि हमको नेपाल के तराई से पानी से
[44:40] डरना पड़ता था। हम धीरे-धीरे उन व्यवस्था
[44:43] को खड़ा कर रहे हैं। आज मैं जरूर कह सकता
[44:46] हूं कि बहुत हद तक जिस बिहार में मात्र 21
[44:50] लाख हेक्टेयर जमीन बिहार के उन्नति के लिए
[44:54] किसानों के पास थे। आज बिहार बदला। आज
[44:58] लगभग 44 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित हो चुके
[45:02] हैं। और हमने प्रण किया है कि 2030 में
[45:06] हमें चुनाव में जाना है। उसके पहले 70 लाख
[45:11] हेक्टेयर जमीन को सिंचित करना बिहार का
[45:14] काम होगा। क्योंकि हम दुनिया को
[45:18] दुनिया में शांति के लिए भी
[45:22] आंदोलन के लिए भी हम जाने जाते हैं। गुरु
[45:25] गोविंद सिंह जी वहीं जन्मे
[45:28] और दुनिया को शांति देने वाला
[45:32] उनको भी
[45:34] यदि ज्ञान प्राप्ति हुई गौतम बुद्ध को तो
[45:38] वह बिहार के बोधगया की धरती पर उनको शांति
[45:43] प्राप्त हुई और
[45:45] और पूरा सनातन समाज पूरे भारत में दुनिया
[45:50] में जब अपने प्रत को परिवार को मोक्ष देने
[45:56] का रास्ता खोजते हैं उसमें भी हम गया जी
[46:00] आते हैं और गया जी में पिंडदान करके उनको
[46:04] मोक्ष देने का काम करते हैं। साथ इसलिए
[46:10] मैं जरूर चाहता हूं कि बिहार की उन्नति
[46:13] में आपका योगदान हो और खासकर बिहार के
[46:17] लोगों से आग्रह करने आया हूं।
[46:21] पूरे भारत के लोग हमें समृद्ध बना रहे
[46:23] हैं। इसमें कहीं दो मत नहीं। लेकिन हम
[46:26] चाहते हैं बिहार के लोग
[46:29] जो जन्मभूमि से निकलकर कर्मभूमि के लिए
[46:32] काम कर रहे हैं। बेंगलुरु जैसे जगह पर भी
[46:36] लाखों की संख्या में हमारे बिहारी आकर काम
[46:39] कर रहे हैं। हम चाहते हैं जो समृद्ध हो
[46:42] गए, जो आगे बढ़ चुके जो अच्छा काम कर रहे
[46:46] हैं वह करते रहे। लेकिन जरूर यह चाहता हूं
[46:50] कि बिहार की समृद्धि के लिए कर्मभूमि से
[46:54] निकलकर जन्मभूमि को भी निर्मित करने का
[46:58] काम कीजिए जिससे कि भारत बदले
[47:01] और क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी
[47:04] चाहते हैं
[47:06] विकसित भारत बने तो उसमें समृद्ध बिहार
[47:10] बनाना पड़ेगा। बिहार समृद्ध होगा
[47:14] तभी हम दुनिया के
[47:17] साथ हम खड़े हो पाएंगे। साथियों हम जरूर
[47:20] कहना चाहते हैं हम पीछे जरूर छूटे। इतिहास
[47:25] के पन्ने में मैं मानने के लिए तैयार हूं
[47:28] कि हमारे लोगों के द्वारा हम पीछे छूटे।
[47:32] लेकिन हम आगे बढ़ना चाहते हैं। आज एआई का
[47:35] जमाना आया। कुछ दिन पहले Facebook,
[47:38] Twitter, Instagram का दौर था। उसके पहले
[47:43] इंटरनेट आए थे, कंप्यूटर आए और जब
[47:46] कंप्यूटर आया तो लोगों ने कहा कि यह
[47:49] दुनिया की नौकरी खा जाएगा।
[47:51] लेकिन एक समय ऐसा आया आज कि आज कोई भी
[47:55] व्यक्ति बिना कंप्यूटर के ज्ञान के मोबाइल
[47:59] के ज्ञान के दुनिया से नहीं जुड़ सकता है।
[48:02] WhatsApp से हम दुनिया को तुरंत जुड़
[48:04] जाते। Facebook से पूरी दुनिया की समाचार
[48:08] हमें तुरंत प्राप्त हो जाता। हम पहले
[48:12] न्यूज़ पेपर पढ़ते थे। आज सिर्फ सोशल
[48:15] मीडिया देख लेते हैं। दुनिया का पूरा
[48:17] रिपोर्ट आ जाता है। साथ आज हमने एआई के
[48:20] माध्यम से बिहार में सुशासन स्थापित करने
[48:25] का प्रयास किया है। और मैं गुरु जी बताना
[48:28] चाहता हूं आपको इस पूरे हिंदुस्तान में इस
[48:30] तरह का मैकेनिज्म आपको कहीं नहीं मिलेगा।
[48:33] हमारे यहां 14 करोड़ लोग हैं। मैं जब
[48:36] मुख्यमंत्री बना तो पहले दो दिन दो-तीन
[48:40] दिन तक तो लोगों ने बधाई दिया। बाद में
[48:43] लोग एक-एक पुरजा देना शुरू किए। कहा कि
[48:45] हमको यह दिक्कत है। किसी को विधवा पेंशन
[48:48] नहीं मिल रहा था। किसी को वृद्धा पेंशन
[48:50] नहीं मिला। किसी को घर नहीं था। किसी को
[48:55] जमीन का दिक्कत था। तो मैंने एक मैकेनिज्म
[48:58] खड़ा किया। और मैंने एक सहयोग कार्यक्रम
[49:01] शुरू किया गुरु जी। इसमें कुछ नहीं है।
[49:05] सारा काम कंप्यूटर करता है। किसी
[49:08] पॉलिटिशियन की जरूरत नहीं है। एक आदेश
[49:10] देना था क्योंकि स्टेट हेड के तौर पर मैं
[49:14] काम करता हूं। तो मुख्यमंत्री के तौर पर
[49:16] मैंने एक आदेश दे दिया।
[49:19] पहला
[49:21] कि कोई आवेदन दे तो 10 दिनों के अंदर यदि
[49:26] किसी ने
[49:27] किसी पदाधिकारी कर्मचारी ने कोई आदेश नहीं
[49:31] किया तो 11वें दिन ऑटोमेटिक एक नोटिस उसको
[49:36] मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यालय से
[49:39] चला जाता है। ऑटोमेटिक
[49:44] इसमें किसी व्यक्ति को अधिकार ही नहीं
[49:46] दिया मैंने।
[49:48] दूसरा
[49:50] 20 दिन जब होता है तो 20 दिन के रात के
[49:54] 12:00 बजे ऑटोमेटिक उसको दूसरा नोटिस चला
[49:58] जाता है और तीसरा नोटिस
[50:04] 25 दिन जब पूरे होते हैं तो 26वां दिन
[50:06] इसको ऑटोमेटिक चला जाता है।
[50:10] लेकिन 30 दिन के बाद उसको नोटिस नहीं जाता
[50:13] है। उसको सस्पेंशन का आर्डर जाता है।
[50:18] [प्रशंसा] इसमें
[50:19] किसी को भी बख्शा नहीं जा सकता। और इसको
[50:24] इस पूरे मैकेनिज्म में मैंने लगाया।
[50:27] ब्लॉक में ऑफिसर्स होते हैं। सब डिवीजन
[50:30] में ऑफिसर्स होते हैं। एक लेवल ऊपर उसका
[50:34] रिव्यू कर सकता है। और रिव्यू करतेकरते
[50:38] यदि किसी ने नहीं सुना किसी ने गलत आदेश
[50:42] किया तो मन पूरे महीने में दूसरा मंगलवार
[50:48] मैं स्वयं बैठता हूं। वैसे आवेदन पर आदेश
[50:52] करता हूं और जितने लोग उससे कनेक्टेड हैं
[50:56] सबको इंटरनेट से वीडियो कॉन्फ्रेंस पर
[50:58] जोड़ता हूं। जो काम गलत करता है उसको सीधे
[51:02] कारवाई करने का काम करता हूं। इसलिए
[51:07] कि जनता को संतुष्ट रखना, जनता की सुविधा
[51:10] बढ़ाना,
[51:11] जनता को न्याय देना
[51:14] यही शासन लोकतंत्र है और आगे भी बिहार
[51:18] समृद्ध हो और क्योंकि
[51:22] बिहार अपने आप में सदियों से वैसी धरती
[51:26] रही है जो दुनिया को ज्ञान देते रहा है।
[51:30] करुणा दी है,
[51:32] दर्शन दिया है। अहिंसा का पाठ पढ़ाया है
[51:37] और आप याद कीजिए
[51:39] जब मोहन करमचंद गांधी
[51:45] मोतिहारी की पावन धरती पर पहुंचे
[51:48] [गला साफ़ करने की आवाज़]
[51:49] और सत्याग्रह शुरू किया तो वही चंपारण
[51:53] धरती उनको महात्मा गांधी बनाने का काम
[51:57] किया वही बिहार है इसलिए आज बिहार उत्सव
[52:01] के लिए आपने मौका दिया गुरु जी मैं आपको
[52:06] फिर से आपको धन्यवाद देना चाहता हूं पूरे
[52:09] बिहार वासियों की ओर से और बिहार समृद्ध
[52:13] हो यह जरूर आपसे आशीर्वाद चाहता हूं कि
[52:16] बिहार भारत के साथ बढ़कर दुनिया में नाम
[52:20] आगे करते रहे यही कामना करते हुए अपनी
[52:23] बातों को विराम देता हूं। बहुत-बहुत
[52:25] धन्यवाद। [प्रशंसा]
[52:28] माननीय मुख्यमंत्री जी आपका बहुत-बहुत
[52:30] आभार इस ऊर्जावान संबोधन के लिए। आपने जो
[52:33] बिहार के बातें बातें कही बिहार के बारे
[52:36] में वह हमें गर्वान्वित करती है और साथ
[52:40] में बताता चलूं गुरुदेव की इस लाइव
[52:43] वेबकास्ट के माध्यम से करीब 180 देश से
[52:45] हजारों लोग अभी हमारे इस कार्यक्रम को
[52:47] लाइव देख रहे हैं। यह हमारे लिए हर्ष का
[52:51] विषय है। और अब हम गुरुदेव से प्रार्थना
[52:54] करेंगे कि अपने आशीर्वचन हमें दें। वी आर
[52:57] हैप्पी टू शेयर दैट थाउजेंड्स ऑफ व्यूअर्स
[53:00] हैव जॉइ अस लाइव फ्रॉम 180 कंट्रीज वाया
[53:03] लाइव वेबकास्ट
[53:05] वि इमेंस लव एंड रेवरेंस मे आई रिक्वेस्ट
[53:08] गुरुदेव टू ब्लेस अस वि ह आशीर्वचन
[53:13] ओम नमः प्रणवार्थाय
[53:17] शुद्ध ज्ञान
[53:19] मूर्त
[53:21] निर्मलाय
[53:23] प्रशााय
[53:25] दक्षिणा
[53:27] मूर्त
[53:36] बिहार प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री
[53:41] सम्राट चौधरी जी
[53:45] और मंचासीन
[53:47] विधानसभा के अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार जी
[53:53] और अन्य सहयोगी गण अध्यक्ष जी
[53:57] और
[54:02] जमाल खान जी
[54:05] और हमारे
[54:10] बीजेपी के अह
[54:13] अध्यक्ष बिहार क्षेत्र के अध्यक्ष
[54:19] संजय संजय जी संजय सरोगे जी
[54:24] मैंने वो बिहार भी देखा है
[54:30] और आज का बिहार भी देखा है जिसमें बहुत
[54:34] जमीन आसमान का फर्क है।
[54:37] [प्रशंसा]
[54:38] 90 के दशक में जब हमारा ट्रेन
[54:43] वाराणसी से गुजर करते बिहार से गुजरते हुए
[54:49] बंगाल जाना होता।
[54:52] बिहार आते ही पुलिस लोग
[54:55] रेल में गाड़ी के अंदर घुस जाते थे।
[55:00] गया में जब हम गया गए थे तो वहां कहते थे
[55:04] कि 5:00 बजे के बाद कोई बाहर नहीं जाता
[55:07] यहां पर।
[55:09] 5:00 बजे के बाद बाहर जाते यह सब बंद।
[55:13] जहां आप है छत्र में है होटल में वहां
[55:16] कमरे में बंद रहो।
[55:20] ऐसी परिस्थिति थी, भयानक परिस्थिति थी
[55:27] और जब हम जहानाबाद गए उस वक्त मेरे ख्याल
[55:32] से 97 या 95 में
[55:35] फिर हमने कहा यहां तो कुछ हमको जरूर करना
[55:38] चाहिए। और हमारे बिहारी बाबू ये संजय
[55:41] बिहारी आए और मैंने उनको कहा आप जाके माले
[55:45] के लोगों से संपर्क करो बातचीत करो तब हम
[55:49] ऋषिकेश में रहते थे मैं आपको बताऊं ये
[55:53] बहुत स्वारस्यकर
[55:56] एक एक घटना है हम वहां शिविर लेते ध्यान
[56:02] का शिविर लेते थे मेरा मन हमेशा था कि
[56:05] बुद्ध की धरती महावीर की धरती धरती राजा
[56:09] जनक के धरती यहां डीएनए में तो ज्ञान है
[56:12] ही उसको कहीं से ऊपर उभारना पड़ेगा अंदर
[56:17] से लोग बड़े प्यारे हैं [प्रशंसा]
[56:20] कोई परिस्थिति वश इस तरह का ये हिंसा के
[56:24] माहौल में पूरा वातावरण है और जब देखते थे
[56:29] अखबारों में मांस के सामूहिक हत्या मर्डर
[56:35] यही सब बहुत हुआ करता था
[56:38] तो मैंने कहा तुम उनसे बात करो जाके
[56:42] और एक और सज्जन को हमने कहा तुम जाकर
[56:44] रणवीर सेना के लोगों से बात करो
[56:47] और हिमालय के लोगों से बात किया फिर इनको
[56:50] बताया देखो गुरु जी वो तो गुरु वग तो
[56:54] मानते नहीं थे अपना बोलते थे मगर गुरुदेव
[56:57] के काफी रशिया में इनके बहुत फॉलोअर्स है
[57:02] अनुयाई रशिया में बहुत है तो ये सुन के
[57:05] माले के बड़े टोली एक ग्रुप हमारे पास
[57:08] आया। मेरे ख्याल से कोई
[57:12] 40 45 लोग आए माले के और सारे इनके टॉप के
[57:18] लोग थे और ऐसे ही कोई 22 लोग 22 या 27 ऐसा
[57:24] कुछ लोग रणवीर सेना के भी आए। ट्रेन से
[57:27] आना पड़ता था। उन दिनों में इतनी यातायात
[57:29] भी नहीं थी। बिहार से ट्रेन से आना पड़ता
[57:32] था। ट्रेन से यह लोग आए। कोई हमारे एक
[57:36] भक्त इनका टिकट विककेट भी कटवा दिए थे।
[57:39] मगर एक दूसरे को पता नहीं था वह कहां जा
[57:43] रहे हैं। [हंसी]
[57:44] तो जब ऋषिकेश के काली कमली वाला आश्रम में
[57:47] जब हम रहते थे ये दोनों ग्रुप वहां आ गए।
[57:51] जब आए तब उनको पता चला कि दूसरे भी हैं।
[57:56] अब ऐसी परिस्थिति बन गई मारपीट की कगार।
[58:02] और यह बोलने लगे कि तुम लोग कैसे हमको आने
[58:06] कैसे हमको बना बताया नहीं धोखा दे दिया इन
[58:09] लोगों को बुलाया करके माले लोग बोले रणवीर
[58:13] सेना के लोग बोलते हैं कि माले लोग आते
[58:15] हैं तो मैं इनको टुकड़े-टुकड़े कर देंगे
[58:19] हम तुरंत चल जाने वाले अब वो लोग पोटली
[58:22] वोटली बांध दिए आते ही बांध ले हमने कहा
[58:24] ये क्या मिशन फेल हो गया क्या
[58:27] पहले दिन ही फेल हो गया
[58:31] मगर
[58:33] देखिए
[58:34] अदृष्ट वर्षात वहां से यातायात किए कोई
[58:38] सोलोयति नहीं थी वहां से ट्रेन नहीं था
[58:41] जाने के लिए इनको ट्रेन में बुकिंग नहीं
[58:44] थी दो दिन तो बुकिंग नहीं मिली इनको जाने
[58:47] के लिए कोई ट्रेन भी नहीं था तो मगर आग
[58:50] बबूला होते रहे मैं दोनों ग्रुप पे
[58:53] अलग-अलग से बैठ के बात करें
[58:56] और उनमें से एक तो बहुत वांटेड क्रिमिनल
[58:59] लगता एक तो बहुत ज्यादा उनके ऊपर कितने
[59:03] सारे डजन केस डजन से ऊपर केस थी
[59:08] वो आते ही बोले पता है हमने कितने लोगों
[59:10] का सिर उड़ाया
[59:15] और उसी शिविर में सुप्रीम कोर्ट के एक जज
[59:19] भी बैठे हुए थे
[59:23] [प्रशंसा]
[59:24] और आईजी भी आए हुए थे पुलिस अधिकारी
[59:30] हम असमंजस में पड़ गए। जब हमारे शिविर में
[59:34] वह बड़ा क्रिमिनल है। हम ना बताएं पुलिस
[59:38] को तो हमारी तो वो वो कानून का उल्लंघन हो
[59:43] जाएगा।
[59:44] और बताएंगे
[59:47] तो कोई सुधार हो ही नहीं सकता। तुरंत ही
[59:49] उनको उठा के ले जाएंगे।
[59:52] तो अभी इस ऐसी हालत में करना क्या है?
[59:55] मैंने कहा जज साहब को सत्संग के बाद
[59:58] बुलाया हमारे कमरे में।
[1:00:01] देखिए हम कुछ लोगों को यहां बुलाए ताकि
[1:00:03] इनमें कुछ सुधार आ जाए।
[1:00:07] अब मैं पुलिस को बताऊं तो सुधार का काम हो
[1:00:11] ही नहीं सकता। ताकि इनके ऊपर तो वांटेड
[1:00:14] क्रिमिनल है। नहीं बताऊंगा तो मैं कानून
[1:00:18] का उल्लंघन हो जाएगा। आप आप बताइए मुझे
[1:00:21] कोई रास्ता दिखाए। क्या करें?
[1:00:24] वैसे गुरु के पास सब सलाह लेते हैं। मैंने
[1:00:27] भी
[1:00:29] जज साहब से मैंने उनका सलाह देखने के लिए
[1:00:32] क्या बोलते?
[1:00:36] मैंने कहा तब उन्होंने कहा गुरु जी आपके
[1:00:40] पास तो सब ज्ञान ध्यान लेने के लिए आ रहे
[1:00:43] हैं। आपको पता नहीं वो कौन है। इतना ही
[1:00:46] रखते हैं अपना।
[1:00:51] आपको पता नहीं अपना इतना ही रखेंगे तो
[1:00:55] मैंने कहा यह बहुत अच्छी बात हो गई अब ये
[1:00:58] तो नहीं कह सकते जज साहब कि आपको पता है
[1:01:01] हमको क्यों नहीं हमको पता है
[1:01:04] मगर आप वो वीडियो भी है यहां पर उसका
[1:01:08] पुराना रतन वीडियो है माले के लोग भी
[1:01:12] क्रिया करी ध्यान किया रणवीर सेना के लोग
[1:01:16] भी किए 2000 वो वो दोनों आपस में मिले
[1:01:21] आंसू बहे वो पूरा माहौल बदल गया। फिर वहां
[1:01:25] से लोग गए।
[1:01:28] [प्रशंसा]
[1:01:29] फिर उन्होंने कहा जहानाबाद में बोले कि
[1:01:34] जहानाबाद में भी बहुत भयानक परिस्थिति थी
[1:01:36] उन दिनों में।
[1:01:39] फिर बोले गुरुदेव आपको आना है। मुजफ्फरनगर
[1:01:41] जहानाबाद सब जगह मुजफ्फरपुर
[1:01:45] जहानाबाद तो
[1:01:48] उसके बाद 2000 के बाद आपने कभी सुना नहीं
[1:01:52] होगा कोई इस तरह से सामूहिक हत्याकांड कभी
[1:01:57] हुआ
[1:01:59] [प्रशंसा]
[1:02:01] पर गरीबी की परिस्थिति तो फिर भी थी जाति
[1:02:05] पात में बैठे हुए थे लोग आपस में बात नहीं
[1:02:08] करते थे तब हमने सामूहिक
[1:02:13] सहबोज सब बैठ के सभी जाति के लोग बैठ बैठ
[1:02:17] के कीर्तन करें और भोजन करें साथ में। यह
[1:02:21] एक प्रतापी तप शुरू किया था।
[1:02:25] मगर मैं अभी पिछले साल जब हम गए तो देखा
[1:02:30] जमीन आसमान का फर्क है। चाहे पूर्णिया
[1:02:34] देखो
[1:02:35] भागलपुर अलग-अलग डिस्ट्रिक्ट में कितना
[1:02:40] डेवलपमेंट हुआ।
[1:02:43] यह श्रेय आपको जाता है। आपको बहुत बधाई
[1:02:46] है। बिहार को ऐसी एक बिहार से उठाकर ऐसी
[1:02:50] स्थिति में ले आए। उन दिनों में दक्षिण
[1:02:53] भारत से किसी को गया जाना हो तो वो गए
[1:02:57] समझते थे।
[1:03:01] अरे भाई वहां तो जाना नहीं है। जाना बड़ा
[1:03:04] मुश्किल है। वापस आएंगे कि नहीं?
[1:03:08] इतना डर था आज वह बात नहीं रहे। आज बिहार
[1:03:15] की उन्नति
[1:03:17] दिखती है [प्रशंसा]
[1:03:20] और इस आश्रम में भी बहुत बिहार बहुत लोग
[1:03:25] कितने लोग हैं आश्रम के बिहार से आए हुए
[1:03:29] यहां सब बैठे
[1:03:36] तो
[1:03:40] मेहनती बहुत है बिहार के लोग और
[1:03:44] इनमें कला है। हर तरह की क्षमता है। ये
[1:03:50] सारी क्षमताओं को बाहर आने के लिए पहले
[1:03:55] वातावरण
[1:03:56] ऐसा होना चाहिए। ऐसे वातावरण आपने और आपकी
[1:04:01] सरकार ने किया है। यह बहुत बधाई है। आपको
[1:04:05] ऐसे एक परिवर्तन
[1:04:07] लाने के लिए देश उस क्षेत्र में उस
[1:04:11] क्षेत्र में आने की वजह से पूरे देश में
[1:04:14] एक अच्छा प्रभाव मिला है। हुआ है।
[1:04:20] क्रांति और शांति दोनों साथ चलना चाहिए।
[1:04:24] सिर्फ शांति चले चलेगी नहीं बात और सिर्फ
[1:04:28] क्रांति की ही आवाज उठते रहे तो भी वो
[1:04:33] टिकता नहीं है। अंदर की शांति बाहर की
[1:04:38] क्रांति
[1:04:39] दोनों होनी चाहिए। [प्रशंसा]
[1:04:43] अंदर उद्वग्न रहे। अंदर शांति ना रहे।
[1:04:46] बाहर शांति की बात करते रहे। वह भी किसी
[1:04:50] काम के नहीं है।
[1:04:52] कायरपन हो जाता उसमें वीर शूर का भी भूमि
[1:04:57] बिहार रही। देखिए संत सिपाही का जो आवाज
[1:05:02] दिए थे गुरु गोविंद सिंह जी उनका भी स्थान
[1:05:05] वही है। तो इसलिए
[1:05:08] आज जो बिहार का जो धरती में परिवर्तन तेजी
[1:05:13] से हो रही है और ऐसे महोत्सव जगह-जगह होने
[1:05:18] से लोगों तक यह खबर पहुंचे। इसका संदेश
[1:05:23] पहुंचे।
[1:05:26] एक कदम आगे चल के
[1:05:31] हम बिहारी तो है यह तो हम मानते पर इससे
[1:05:35] बढ़के एक है हम एक आध्यात्मिक जीव है जो
[1:05:40] वसुधैव कुटुंबकम मानने वाले हम सबको
[1:05:45] अपनाने की कला हमारे पास है सिर्फ
[1:05:50] इतने सारे देशों में भारत एक ऐसी देश है
[1:05:53] जिसमें सबको अपनाने का कला है। यहां देखिए
[1:05:57] आज कहां-कहां से आया? मंगोलिया से लोग आए
[1:06:01] हैं। आज
[1:06:03] जापान से आए हैं। और यहां आज महाराष्ट्र
[1:06:06] से आए हैं। कई लोग महाराष्ट्र से गुजरात
[1:06:09] से आए हैं। गुजराती भाई कल तो गुजरात का
[1:06:13] सेलेब परसों गुजरात का अन्नकूट है। कितने
[1:06:17] तरह का व्यंजन आप बनाते हैं। तैयारी कर
[1:06:20] रहे हैं। तो हर प्रांत की अपनी खूबी है।
[1:06:24] और हर तालुक का भी ऐसी खूबी है। हर राज्य
[1:06:28] का तो है विशेषता। आप सबको यहां अभी जाना
[1:06:32] चाहिए उधर बिहार महोत्सव का। वहां सब
[1:06:36] टेकवा ये सब स्टॉल्स लगी हुई है। भूख तो
[1:06:39] लग रही होगी ऑलरेडी। आप लोग किचन में भी
[1:06:42] वही बिहारी खाना है। आज
[1:06:45] बिहार का व्यंजन है। इस आश्रम
[1:06:51] हर हफ्ते अलग-अलग प्रांत के लोगों को
[1:06:54] निमंत्रण करता वहां का भोजन, वहां का कला,
[1:06:58] वहां की संस्कृति, वहां का नृत्य और संगीत
[1:07:03] यहां पर चलता है। ताकि हम यह सब एक परिवार
[1:07:07] के हैं। एक परिवार वसुधैव कुटुंब ये रखना
[1:07:12] चाहे [प्रशंसा]
[1:07:14] भाषा और भूमि के प्रति स्वाभिमान
[1:07:18] और समस्त संसार के प्रति सौहार्दता
[1:07:22] सौहार्द भाव हमारे हमारे भीतर होनी चाहिए।
[1:07:26] यही आध्यात्म सिखाता है। प्रसन्न रहो,
[1:07:30] खिलने रहो
[1:07:32] और
[1:07:34] सबको स्नेह बांटो, प्रेम बांटो।
[1:07:39] हां
[1:07:41] [प्रशंसा]
[1:07:45] वह चीज हमको
[1:07:48] अभी सुदृढ़ करना है। यह कब होगा? जब हम
[1:07:51] तनाव से मुक्त होते हैं। जब तनाव से भर
[1:07:55] जाते हैं, घर का माहौल भी बिगाड़ देते
[1:07:58] हैं। बिगाड़ देते हैं। एक व्यक्ति एक घर
[1:08:01] में दुखी रहता है, तो पूरा घर का सुख को
[1:08:05] छीन लेता है। वो है कि नहीं? बताओ
[1:08:10] आप लोग
[1:08:12] छठ पूजा में सब इकट्ठे होते हो। एक
[1:08:15] व्यक्ति छठ उस वक्त जो आए हुए उसका
[1:08:18] मनमुटापा हो जाता है। तो बाकी सब लोगों का
[1:08:22] उत्सव में पानी फेर देते हैं। इसलिए हर
[1:08:26] व्यक्ति हर घर ध्यान होना आवश्यक है। हर
[1:08:30] घर पर ध्यान हर व्यक्ति ध्यान करें। हमारा
[1:08:33] भारत सरकार माननीय प्रधानमंत्री जी के
[1:08:37] नेतृत्व से उन्होंने यह भी किया कि घरघर
[1:08:40] में ध्यान हो। हर घर ध्यान करें।
[1:08:44] वो स्वयं ध्यान करते हैं हमारे
[1:08:46] प्रधानमंत्री जी और योग और ध्यान के
[1:08:49] प्रचार प्रसार के लिए बहुत तेजी से वो
[1:08:53] कार्य निरत रहते हैं।
[1:08:56] ऐसे यहां पीएन मिश्रा जी भी बैठे हैं। वो
[1:08:59] भी बिहार से हैं। हमारे ये अयोध्या के
[1:09:05] उसमें हम जब अयोध्या के पैनल में थे। ये
[1:09:08] इलाहाबाद हाई कोर्ट में इन्होंने काफी
[1:09:11] अपना
[1:09:12] राम मंदिर के बारे में प्रस्तुत किया।
[1:09:16] वहां इनकी जीत हुई। [प्रशंसा]
[1:09:20] बहुत इन्होंने तो लंदन जाकर वहां सारे
[1:09:22] लाइब्रेरी तलाश करके बहुत पढ़े। बहुत
[1:09:26] इन्होंने उस पर सीखा भी है।
[1:09:29] अभी आप एडवोकेट है सुप्रीम कोर्ट के। आज
[1:09:33] वह भी आप हमारे साथ हैं। तो
[1:09:38] आज इस बात पर हम सब
[1:09:42] निश्चय करके चले कि क्या हमारे पास जो भी
[1:09:46] ईश्वर ने दिया वो औरों के काम आने के लिए
[1:09:50] मान लो आपकी आपकी आवाज बहुत मधुर है तो
[1:09:54] अपने आवाज से आप क्या करोगे
[1:09:57] आप बाथरूम में गाते रहोगे बस
[1:10:01] नहीं आपकी आवाज औरों को औरों के लिए है आप
[1:10:05] में बुद्ध बुद्धि शक्ति है
[1:10:08] वह औरों का काम आ जाए। आप में नेतृत्व की
[1:10:12] शक्ति ईश्वर ने दिया। वो समाज को एक अच्छे
[1:10:15] दिशा पर ले जाने के लिए दिया। इस तरह का
[1:10:19] एक
[1:10:22] समझ हमारे में आ जाए। जो हमारे पास है वह
[1:10:27] सब ईश्वर ने औरों को लिए दिया। औरों के
[1:10:31] लिए दिया।
[1:10:33] यही गीता का मुख्य संदेश है। तभ्य में
[1:10:36] तमेव तभ्यमेव समर्पयत
[1:10:40] तेरे को ही हम समर्पण करते हैं। इस समर्पण
[1:10:44] भाव से हम जीवन में आगे बढ़ते हैं।
[1:10:49] श्रद्धा सहनशीलता और समर्पण
[1:10:53] तो जीवन निरंतर प्रगति के ओर निकलता
[1:10:58] रहेगा। चलता रहेगा। तो मैं सम्राट चौधरी
[1:11:03] जी को
[1:11:05] बधाई देता हूं और आशीर्वाद भी देता हूं और
[1:11:08] ऐसे ही आप काम करते रहें बिहार को और
[1:11:12] ऊंचाई तक पहुंचाते रहिएगा
[1:11:15] और आप स्नेह पूर्ण व्यक्तित्व आपका सबको
[1:11:19] साथ में ले चलने का सबसे प्रेम से बड़े
[1:11:22] कर्मठ व्यक्ति हैं आप ऐसे ही आपके सब
[1:11:26] सहयोगी भी आपके साथ हैं। आप सबको ईश्वर
[1:11:31] मंगल करें और सबको आशीर्वाद के साथ हमारा
[1:11:35] वाणी को विश्राम देते हैं। ओम शांति
[1:11:38] [प्रशंसा]
[1:11:43] टुडे वी आर आल्सो ऑनर्ड टू हैव विद अस
[1:11:46] श्री एस मंजूनाथा जी ऑनरेबल एमएलए
[1:11:50] सकलेशपुरा असेंबली कास्टीटुएंसी हसन
[1:11:54] डिस्ट्रिक्ट वी वार्मली वेलकम यू टू द
[1:11:57] आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर [प्रशंसा]
[1:12:16] बहुत-बहुत
[1:12:20] अभिनंदन आभार बिहार पर आशीर्वाद के लिए हम
[1:12:25] कृतज्ञ हैं। हम समस्त बिहारवासी बहुत-बहुत
[1:12:28] आभार गुरुदेव
[1:12:29] मेरे ख्याल से हर साल होना चाहिए ऐसे
[1:12:31] बिहार महोत्सव एक दिन बेंगलुरु में अच्छा
[1:12:35] पहले बिहार के पहले मुख्यमंत्री हैं आप
[1:12:38] बेंगलुरु में पधारे हैं कर्नाटक में