Transcript
[0:00] अब हम बिहार के माननीय विधान परिषद सदस्य
[0:04] श्री सच्चिदानंद राय जी से अनुरोध करते
[0:07] हैं कि कृपा सभा को संबोधित करें।
[0:24] जय गुरुदेव।
[0:30] मैं बता नहीं सकता।
[0:33] मैं अपने आप को कितना
[0:36] भाग्यशाली समझता हूं
[0:39] कि आज हमारे परम पूज्य गुरुदेव के
[0:44] मंच पर से मुझे
[0:46] उन्हें अभिवादन करने का सौभाग्य प्राप्त
[0:49] हो रहा है।
[0:55] हर भक्त हर शिष्य के
[0:58] हृदय में कामना होती है
[1:02] कि कभी
[1:04] गुरु का बुलावा आए
[1:07] और हम उनके दर्शन प्राप्त कर सके। दर्शन
[1:10] लाभ ले सके। आज तो पूरा
[1:14] सागर ही मेरे पास पहुंच गया। जब मुझे मंच
[1:18] पर उनके साथ बैठने का सौभाग्य प्राप्त
[1:20] हुआ। इन क्षणों को मैं अपने जीवन में कभी
[1:24] भी विस्मित नहीं कर पाऊंगा। अह बहुत-बहुत
[1:29] धन्यवाद तो गुरु को नहीं दिया जा सकता
[1:31] लेकिन बहुत-बहुत आभार प्रकट करना चाहूंगा
[1:33] कि मुझे अवसर प्राप्त हुआ।
[1:36] साथ में
[1:39] बिहार सरकार के शिक्षा की जिम्मेवारी
[1:43] जिनके कंधे पर है और जब से उन्होंने यह
[1:46] भार संभाला है तब से लगातार
[1:49] बिहार और बिहार के शिक्षा विभाग को
[1:51] गौरवान्वित करने का कार्य कर रहे हैं।
[1:54] मेरे अनुज श्री मिथिलेश कुमार तिवारी जी
[1:57] उनके साथ मुझे पटना से यहां आने का और कल
[2:00] उन्हीं के साथ वापस जाने का भी सौभाग्य
[2:02] प्राप्त हो रहा है। इसके लिए मैं अपने आप
[2:04] को बहुत-बहुत धन्य समझता हूं।
[2:08] इस सभा में
[2:11] गुरुदेव के भक्तों के शिष्यों की भीड़ है।
[2:16] एक एक व्यक्ति के चेहरे पर साफ वो श्रद्धा
[2:18] दिख रहा है।
[2:22] मैं आप सबको भी प्रणाम करता हूं कि आपके
[2:25] समक्ष भी आज मुझे दो शब्द रखने का अवसर
[2:27] प्राप्त हुआ।
[2:30] बहनों और भाइयों
[2:35] जब से मनुष्य का जीवन मनुष्य का तन
[2:37] प्राप्त किया है तब से चुनौतियों के लिए
[2:41] भी तैयार रहना हमारे माता-पिता ने हमें
[2:45] सिखाया है। हमारे गुरुओं ने हमें सिखाया
[2:47] है। जीवन में अगर एक सत्य है कि अवश्य
[2:51] प्राप्त होगा तो वो है चुनौतियां
[2:54] कठिनाइयां।
[2:57] गुरु रहने से एक
[3:00] काम बड़ा आसान हो जाता है कि चाहे
[3:02] चुनौतियां जितनी ही बड़ी क्यों ना हो,
[3:04] कठिनाइयां कितनी ही बड़ी क्यों ना हो,
[3:06] आपदा विपदा कितनी ही बड़ी ना हो, मन का
[3:09] विश्वास कभी कमजोर नहीं होता और लगता है
[3:12] गुरुदेव सब देख रहे हैं। गुरुदेव सब संभाल
[3:14] लेंगे और इसको मैंने अपने जीवन में उतारा
[3:18] है और आपके सामने मैं एक साक्षी के रूप
[3:21] में खड़ा होकर कहना चाहता हूं कि गुरु
[3:24] जिसके साथ है वो कभी पराजित नहीं हो सकता।
[3:27] गुरु जिसके साथ है वो कभी दुखी नहीं हो
[3:30] सकता। गुरु का आशीर्वाद जिसको प्राप्त है
[3:32] उसे और किसी चीज की आवश्यकता है ही नहीं।
[3:36] क्योंकि गुरु जिसके साथ है उसे सब प्राप्त
[3:38] है।
[3:40] और मैं बड़ा भाग्यशाली हूं।
[3:42] जब से गुरुदेव के मुझे प्रथम दर्शन
[3:44] प्राप्त हुए करीब 10 वर्ष पहले तब से आज
[3:47] तक गुरुदेव मुझे मेरे जन्मदिन पर भी याद
[3:49] रखते हैं और कभी कोई छोटी मोटी कठिनाई भी
[3:53] होती है तो विश्व के चाहे जिस कोने में हो
[3:56] उनका फोन मुझे आ जाता है कहते हैं
[3:58] सच्चिदानंद जी आप कैसे हो और मेरा जवाब
[4:01] होता है गुरुदेव जिसके पास आपका फोन आता
[4:03] है भला वो तकलीफ में कैसे हो सकता है उसे
[4:06] कष्ट क्या हो सकता है
[4:09] तो इसीलिए आज का अवसर सर एक और विशेष रूप
[4:13] से खास है कि बिहार महोत्सव मनाया जा रहा
[4:15] है। हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी आज से
[4:17] चार दिन पहले तीन तारीख को आकर उद्घाटन
[4:19] दिए थे और इसी मंच पर से उन्होंने अपनी
[4:21] बात रखी थी। समापन के दिवस पर मुझे भी
[4:24] अवसर प्राप्त हुआ है। यह भी सौभाग्य की
[4:26] बात है। बिहार महोत्सव मेला में हम लोग गए
[4:30] थे। वहां जितने स्टॉल पर हम लोग गए। एक एक
[4:32] व्यक्ति इतना प्रसन्न था, एक-ए व्यक्ति
[4:35] इतना गौरवान्वित महसूस कर रहा था और एक एक
[4:38] स्टॉल वाले अपने बिजनेस से इतना खुश थे कि
[4:41] मुझे लगा कि नहीं शायद पहली बार बिहार
[4:45] महोत्सव यहां मनाया गया लेकिन हर वर्ष
[4:47] मनेगा और इससे भी ज्यादा भव्यता से मनेगा
[4:50] और हम लोग फिर आएंगे बार-बार आएंगे। मुझे
[4:53] विश्वास है कि गुरुदेव की प्रेरणा हमें
[4:55] मिलेगी याद करेंगे। हम उपस्थित होंगे।
[4:57] इन्हीं शब्दों के साथ और इसी संकल्प के
[5:00] साथ मैं आप सब से विदा लेता हूं और गुरु
[5:02] जी से आज्ञा लेता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद।
[5:07] आपके स्नेह पूर्ण शुभकामनाओं के लिए
[5:09] हार्दिक धन्यवाद। अब हम बिहार के माननीय
[5:13] शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश कुमार तिवारी
[5:16] जी से अनुरोध करते हैं कि कृपा सभा को
[5:20] संबोधित करें।
[5:26] गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो
[5:28] महेश्वर गुरु साक्षात परम ब्रह्म तस्मै
[5:32] श्री गुरुवे नमः सर्वप्रथम
[5:36] आज हम
[5:38] पूज्य गुरुदेव श्री श्री
[5:41] रवि रविशंकर जी महाराज के चरणों में अपनी
[5:45] ओर से बिहार के 14 करोड़ लोगों की ओर से
[5:49] गुरुदेव के चरणों में प्रणाम निवेदित करते
[5:52] हैं
[5:54] और आज हमें
[5:57] गुरुदेव ने यह अवसर दिया है
[6:00] कि जिन्होंने दुनिया को आर्ट ऑफ लिविंग
[6:02] सिखाया
[6:04] आज उनके सानिध्य में आकर बिहार की ओर से
[6:08] दो शब्द कहने का अवसर मिला है।
[6:12] गुरुदेव के 17व 17 वे जन्मदिवस के अवसर पर
[6:19] गुरुदेव भगवान ने
[6:21] बिहार दिवस का आयोजन बेंगलुरु में करके 14
[6:25] करोड़ लोगों के मान और सम्मान के साथ-साथ
[6:30] उन्हें आशीर्वाद देने का कार्य किया है।
[6:32] इसलिए हम परम पूज्य गुरुदेव के चरणों में
[6:36] बिहार वासियों की ओर से प्रणाम निवेदित
[6:38] करते हैं।
[6:40] कल 5 सितंबर था और शिक्षक दिवस भी था। मैं
[6:45] शिक्षा मंत्री हूं। इसके नाते हमने बिहार
[6:48] के 6 लाख शिक्षकों को
[6:51] अपनी ओर से पत्र भी लिख के और उन्हें
[6:53] सम्मान देकर के और हमने खुद को सम्मानित
[6:57] होने का अनुभव प्राप्त किया है और आज 6
[7:01] सितंबर है और आज गुरुदेव भगवान के यहां
[7:05] उपस्थित होकर
[7:07] मुझे
[7:09] गुरुदेव के लिए कुछ कहने का अवसर मिला है
[7:12] तो मैं अपने को बहुत ही भाग्यशाली समझ रहा
[7:14] हूं।
[7:16] गुरु हमारी सनातन परंपरा के सबसे बड़े
[7:20] स्तंभ हैं।
[7:22] अगर गुरु नहीं तो ज्ञान नहीं, गुरु नहीं
[7:26] तो संस्कृति नहीं। ठीक ही कहा सच्चिदानंद
[7:29] राय जी ने कि जिसके ऊपर श्री श्री का
[7:33] आशीर्वाद हो। वह दुनिया में जाकर के
[7:36] स्वामी विवेकानंद जी के मा के जैसा भारत
[7:40] का प्रतिनिधित्व कर सकता है। इतना ताकत
[7:42] इतनी शक्ति गुरु के आशीर्वाद में है।
[7:48] आज पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में हमने
[7:53] इस धाम की यात्रा की और इस धाम की यात्रा
[7:57] के बाद मुझे ऐसा लगा
[8:00] कि मैं बिहार की ओर से गुरुदेव से कुछ
[8:02] मांगू लेकिन इसके लिए मुझे कल 10:00 बजे
[8:06] का समय मिला है। हमारे माननीय मुख्यमंत्री
[8:09] जी यहां आए थे। उन्होंने भी पूज्य गुरुदेव
[8:13] से कुछ मांगा ही होगा।
[8:16] लेकिन मैं भी कुछ मांगने के लिए ही आया
[8:18] हूं। और शिष्य को तो गुरुदेव से मांगने का
[8:20] अधिकार होता ही है।
[8:23] मुझे यह विश्वास है कि गुरुदेव
[8:27] अपने शिष्यों को कभी निराश नहीं करते हैं
[8:29] तो मुझे भी निराश नहीं करेंगे।
[8:33] पूज्य गुरुदेव आपको
[8:37] आपने दुनिया को बताया है कि बिहार ज्ञान
[8:40] की भूमि रही है। यह वह बिहार है जहां जहां
[8:44] प्रभु श्री राम ने शिक्षा के लिए चुना था।
[8:48] ज्ञान के लिए चुना था। जन्म उन्होंने
[8:51] उत्तर प्रदेश में जरूर लिया लेकिन अपने
[8:53] ज्ञान के लिए बिहार को चुना। जहां से जैन,
[8:57] बौद्ध जैसे धर्मों का प्रादुर्भाव हुआ
[9:01] और जिस बिहार में मां जानकी ने जन्म लेकर
[9:05] के बिहार को कृतार्थ करने का काम किया और
[9:08] आज बिहार की भूमि को सबसे ज्यादा पवित्र
[9:10] भूमि माना जाता है। जब कहते हैं कि प्रभु
[9:15] श्री राम के ससुराल बिहार में आपका स्वागत
[9:17] है। लौका ननिहाल बिहार में आपका स्वागत है
[9:21] तो बिहार की भूमि धन्य हो जाती है। आज
[9:24] यहां पूरा देश बैठा हुआ है। जब यहां पूरा
[9:27] देश बैठा हुआ है तो गुरुदेव के आशीर्वाद
[9:30] से संपूर्ण मानवता को आप मैं अपनी ओर से
[9:34] नमन करता हूं। अभिनंदन करता हूं। यहां
[9:37] जितनी बैठी देवियां हैं उनमें मैं सीता का
[9:39] रूप देखता हूं। और जितने हमारे भाई बंधु
[9:43] यहां बैठे हैं उनमें मैं प्रभु श्री राम
[9:46] के चारों भाइयों की आकृति भी देखता हूं।
[9:49] भारतीय दृष्टि जिस प्रकार से पूरी दुनिया
[9:52] में पूज्य गुरुदेव के माध्यम से फैली है।
[9:56] इस पर हमें बड़ा ही गर्व है और हम आज
[10:01] असत्य पर सत्य की धर्म अधर्म पर धर्म के
[10:04] विजय को लेकर
[10:06] आज आगे बढ़ते हुए भारत के एक नागरिक के
[10:10] रूप में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र
[10:13] मोदी जी के नेतृत्व में हम अहलादित हैं।
[10:16] हम इस बात को लेकर के निश्चिंत हैं कि आज
[10:20] भारत विश्व गुरु बनने की तरफ बढ़ चुका है
[10:23] और यह तभी संभव है जब भारत अपने मूल
[10:27] नीतियों मूल सिद्धांतों पर आगे बढ़े।
[10:30] बिहार ज्ञान परंपरा की भूमि है। इसीलिए
[10:33] पूज्य गुरुदेव से आग्रह है कि ऐसे तो आपका
[10:36] आशीर्वाद सभी को मिलता है। बिहार को आपके
[10:40] विशेष आशीर्वाद की जरूरत है और हमें
[10:42] विश्वास है कि आप बिहार को विशेष आशीर्वाद
[10:44] देंगे।
[10:47] [प्रशंसा]
[10:51] पूज्य गुरुदेव
[10:54] आपके सानिध्य में आकर मुझे भी ऐसा लगता है
[10:58] कि मैं यहां छात्र के रूप में यहां
[11:00] उपस्थित हूं
[11:02] और आज मैं कुछ सीखने आया हूं। इसीलिए
[11:05] गुरुदेव के सामने बहुत बोलने की हिम्मत
[11:08] नहीं जुटा पा रहा हूं।
[11:11] क्योंकि आपकी आज्ञा है इसलिए मैं अपनी ओर
[11:13] से कुछ कहने के लिए आया हूं।
[11:16] पूरे देश में जो युवा शक्ति है उससे 2%
[11:20] ज्यादा युवा शक्ति बिहार की है। और इसीलिए
[11:25] जब पूरा देश जिस समय आज का युवा जब
[11:28] बुजुर्ग होगा तो दो साल बाद बिहार बुजुर्ग
[11:32] की श्रेणी में आएगा तब तक और युवा हमारे
[11:34] युवा होकर के आगे आ जाएंगे। इसीलिए युवा
[11:37] शक्ति ही देश का भविष्य है और इस युवा
[11:40] शक्ति को आपके आशीर्वाद की जरूरत है। आज
[11:43] जिस प्रकार से पाश्चात्य सभ्यता संस्कृति
[11:47] ने
[11:48] हमारी मूल अवधारणा को हमसे अलग किया है।
[11:52] आपकी ओर देखता हूं तो ऐसा लगता है
[11:56] कि आप एक ऐसे आशा के किरण हैं कि हमारे
[11:59] भारत के तमाम युवाओं को सही दिशा देने के
[12:02] लिए दिन रात कार्यरत हैं और आपके दिशा में
[12:05] ही हमारे देश के युवा इस देश को आगे बढ़ा
[12:08] सकते हैं।
[12:11] हमारे यहां कहा गया है पुनरागमनाए च आज
[12:15] बिहार दिवस की पूर्णाहुति भी है लेकिन
[12:18] हमारी संस्कृति में पुनरा आगमनाए च की
[12:21] परंपरा है और इसीलिए आज हम इस बिहार दिवस
[12:26] के अवसर पर गुरुदेव को यह कहना चाहेंगे कि
[12:30] बिहार ने एक लंबी उड़ान
[12:33] के लिए अपने को तैयार किया है
[12:36] और गुरुदेव
[12:38] बिहार में वह सब प्रकार की क्षमता है
[12:42] जिससे बिहार इस देश को 2047 में विकसित
[12:46] भारत बनाने के लिए एक अपना अहम रोल कर
[12:50] सकता है और इसके लिए भारतीय मूल शिक्षा
[12:55] पद्धति
[12:56] के साथ-साथ वेद भी विज्ञान भी आधुनिक
[13:00] शिक्षा भी इन सबों के लिए हम लोग लगातार
[13:03] प्रयास कर रहे हैं। एक छोटे से समय में
[13:06] बतौर शिक्षा मंत्री हमने बिहार में
[13:09] रिफॉर्म से परफॉर्म करने का निर्णय लिया
[13:11] है
[13:14] और हार्ड वर्किंग से स्मार्ट वर्किंग को
[13:16] भी हमने आगे बढ़ाने का काम किया है।
[13:19] गुरुदेव भगवान से आग्रह है
[13:23] कि कहा गया है गुरु गोविंद दो खड़े काको
[13:25] लागू पाए। बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो
[13:28] बताए। गोविंद से साक्षात्कार कराने का
[13:32] कार्य गुरु का है और आप प्रतिदिन
[13:37] असंख्य लोगों को उनके अंदर छुपे हुए स्व
[13:40] को जगाने का काम करते हैं।
[13:44] आज हम और सच्चिदानंद राय जी बहुत
[13:46] भाग्यशाली हैं कि आपके बगल में बैठकर के
[13:50] और सत्संग में पहुंचे हजारों ऐसे ऐसे
[13:54] सनातनी योद्धाओं का दर्शन करने को का अवसर
[13:57] मिल रहा है जो विरले ही मिलता है। यहां
[14:00] सभी लोग अपने आप को
[14:04] आपके चरणों में समर्पित करके पहुंचे हैं
[14:07] और हम यह मानते हैं कि इस
[14:10] आज के इस सत्संग सभा में जो सबसे पीछे
[14:14] बैठा हुआ व्यक्ति है वह आपका सबसे दुलारा
[14:17] है और जो आपके नजदीक बैठा है उसे अवसर एक
[14:21] दिन का मिला है। लेकिन जो सबसे पीछे बैठा
[14:24] है वो आपका दुलारा है। और उस पर आपकी कृपा
[14:27] सबसे ज्यादा बरस रही होगी। इसीलिए मैं आज
[14:30] के दिन गुरुदेव को कहूंगा ज्ञान को जीवन
[14:34] से जोड़ना है तो आपकी कृपा और आपकी
[14:37] अनुकंपा आवश्यक है। शिक्षा को संस्कार से
[14:40] जोड़ना है तो बिना आपके कृपा बिना आपके
[14:45] मार्ग निर्देशन में यह संभव ही नहीं है।
[14:48] संस्कार और सेवा यह हर व्यक्ति के जीवन का
[14:52] आधार होना चाहिए। क्योंकि अपने लिए जिए तो
[14:55] क्या जिए? अगर औरों के लिए जिए तभी सही
[14:59] जिए और इसी बात को मानने के लिए इसी बात
[15:02] को समझने के लिए हम लोग आज यहां पहुंचे
[15:05] हैं। आज
[15:07] एक बार पुनः मैं ईश्वर से प्रार्थना
[15:11] करूंगा समस्त बिहार वासियों की ओर से
[15:14] प्रार्थना करूंगा कि आज हम लोग 70 वे
[15:18] वर्षगांठ के अवसर पर यहां उपस्थित हैं।
[15:21] 117वा वर्षगांठ भी हम लोग इसी प्रकार
[15:23] गुरुदेव का मनाएं और तब तक
[15:27] और इसी प्रकार आपका आशीर्वाद हम पाएं
[15:30] और यह जो बिहार दिवस की शुरुआत आपने की है
[15:34] बिहार में गुरुदेव इसकी बहुत चर्चा है और
[15:38] बिहार के लोग इसको ले बहुत अभिभूत हैं। और
[15:41] हम उन सभी बिहार वासियों को चाहे मिथिला
[15:44] पेंटिंग के माध्यम से चाहे भागलपुर के
[15:47] सिल्क साड़ियों के माध्यम से चाहे भोजपुर
[15:50] के लिट्टी चोखा से आज हमने देखा हमारे
[15:53] बिहारी भाई इस बेंगलुरु जैसे शहर में जो
[15:57] विज्ञान की धरती रही है और यहां अपने
[16:00] संस्कृति को उन्होंने जगा करके रखा है। उन
[16:03] सभी बिहारी भाइयों को हम यहां से प्रणाम
[16:05] करते हैं और हमारे बिहारी माताओं और
[16:09] बिहारी बहनों को भी हम प्रणाम करना चाहते
[16:11] हैं जो यहां रहते हैं तो भारतवर्ष को
[16:14] विकसित भारतवर्ष बनाने का सपना भी देखते
[16:17] हैं तो बिहार की सभ्यता संस्कृति को भी
[16:20] जगा के रखते हैं। जब छठ पर्व होता है
[16:22] गुरुदेव तो यहां के हमारे जितने भाई बंधु
[16:25] हैं बहुत हम लोगों को फोन करके यहां
[16:28] बुलाते हैं। लेकिन हम सब लोगों की परेशानी
[16:31] यह होती है कि बिहार में कोई ऐसा घर नहीं
[16:35] बचता जहां छठ पूजा नहीं होती है। तो यहां
[16:38] भी छठ पूजा धूमधाम से मनाई जाती है और
[16:40] बिहार के तो घरघर में मनाई जाती है और
[16:43] बिहार ही एक ऐसा राज्य है जहां पे उगते
[16:47] हुए सूरज को प्रणाम भी किया जाता है और
[16:50] डूबते हुए सूरज को भी प्रणाम किया जाता
[16:52] है। यह अलग प्रकार की अद्भुत संस्कृति है।
[16:56] और राजा और रंक दोनों ही एक साथ नदी के
[17:00] किनारे बैठकर पोखर तालाब के किनारे बैठकर
[17:05] और कहा जाता है मन चंगा तो कठौती में गंगा
[17:09] और चाहे वह पोखर का पानी हो चाहे वो कुएं
[17:13] का पानी हो चाहे नदी का किनारा हो सभी जगह
[17:17] लोग अभिभूत होकर के और मां गंगा के समक्ष
[17:21] छठ माता का को अर्घ देते हैं और साक्षात
[17:24] सूर्यदेव भगवान को पूजते हैं। यह बिहार की
[17:28] परंपरा ही है जो आज पूरी दुनिया को
[17:31] संस्कृति और संस्कार से जोड़े हुए और उस
[17:34] दिन ऊंचनीच जाति पंथ संप्रदाय का भेदभाव
[17:37] खत्म हो जाता है और उस दिन लगता है कि
[17:40] भारतवर्ष अनेकता में एकता का देश है। यह
[17:44] एक अद्भुत संगम अगर मिलता है तो छठ पर्व
[17:46] के दिन मिलता है। गुरुदेव
[17:49] पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने कहा था
[17:52] अंत्योदय ही राष्ट्रीय उदय है और इसीलिए
[17:55] हम बिहार की सरकार ने यह ठाना है कि सबसे
[18:00] सुदूर इलाके में रहने वाले एक गरीब की
[18:03] झोपड़ी में पलने वाला उनका बच्चा भी एक
[18:06] अच्छी शिक्षा लेकर के और देश के लिए काम
[18:09] करें। अपने राष्ट्र के लिए काम करें और वह
[18:12] भी आगे बढ़े क्योंकि उसको भी उतना ही
[18:15] अधिकार है जितना एक समृद्ध परिवार को
[18:18] अधिकार है और इसीलिए हमारी सरकार ने हर
[18:21] प्रकार की नीतियों को बनाकर और उसको आगे
[18:24] बढ़ाने का कार्य किया है। हम समय-समय पर
[18:27] चाहेंगे गुरुदेव का आशीर्वाद और
[18:30] मार्गदर्शन बिहार के शिक्षा विभाग को भी
[18:32] बिहार की सरकार को भी मिले जिससे हम
[18:35] वैश्विक
[18:37] कंपटीशन के इस दौर में बिहार को आगे ले
[18:40] जाएं और नालंदा विश्वविद्यालय आज जहां है
[18:44] वह विश्व के ज्ञान का केंद्र था और बिहार
[18:47] सरकार ने ठाना है। पुनः बिहार को विश्व
[18:51] गुरु बनाना है। इसके लिए हम लोग लगातार
[18:53] काम कर रहे हैं। आपके आशीर्वाद की छाया
[18:56] में हम लोग इसमें सफल हो। पूरे भारतवर्ष
[18:59] के सभी भाइयों का सहयोग हमें मिले और एक
[19:02] बार फिर से बिहार ज्ञान और विज्ञान की
[19:05] धरती बने जहां वेद और विज्ञान एक साथ आगे
[19:09] बढ़े। इसी आशा कामना और मनोकामना के साथ
[19:12] पूज्य गुरुदेव भगवान के चरणों में प्रणाम
[19:14] निवेदित करते हुए और अगर हमसे हमने कुछ
[19:19] गलत कह दिया हो तो गुरुदेव से भी क्षमा
[19:22] याचना करना चाहेंगे और गुरुदेव के भक्त
[19:25] जितने यहां बैठे हैं एक बार हम आप सबको
[19:28] कहेंगे कि एक गुरुदेव भगवान की
[19:31] जय
[19:32] भक्त भक्त वरस्थल भगवान की
[19:35] जय
[19:36] बहुत-बहुत धन्यवाद जय श्री राम
[19:41] आपके स्नेह पूर्ण शुभकामना के लिए आपका
[19:44] हार्दिक धन्यवाद।
[19:49] वी हैव कनाडा एक्टर्स एंड क्रिएटर्स इन द
[19:52] आश्रम विद अस टुडे एंड दे हैव अ फ्यू
[19:55] क्वेश्चंस फॉर यू गुरुदेव इंदु आश्रमद्ली
[19:59] नम कन्नडा नटरु मत सृष्टि इंदारे अवर
[20:04] गुरुदेव निम के प्रश्न केु बसारे
[20:10] हां आज रविवार होने के नाते यहां कुछ समय
[20:16] कन्नड में बातचीत चलेगी। तो आप जिनको समझ
[20:20] में नहीं आता उसको ऐसे समझिए जैसे संगीत
[20:23] सुन रहे हैं। कन्नड़ बड़ी मीठी बोली है।
[20:29] देखिए संगीत जब साज बजता है उसमें क्या बज
[20:32] रहा है नहीं देखते। सिर्फ उसका धुन से ही
[20:35] हम घुलमिल जाते हैं। तो जब कोई भाषा समझ
[20:39] में नहीं आता हो तो हमें कैसे सुनना
[20:42] चाहिए? जैसे जैसे कोई साज बज रही है, कोई
[20:46] धुन सुन रहे हैं। ऐसे सुनते रहिए। थोड़ी
[20:49] देर कन्नड़ में व्याख्या होगी।
[20:52] हां
[20:57] नमस्कार
[21:01] नमस्कार गुरुदेव न प्रश्न
[21:07] कैमरा फोकस
[21:10] प्रश्न
[21:11] नमस्कार गुरुदेव न वाण श्री
[21:15] चित्र रंगत वर्ष मारता कन्नडा चित्र रंग
[21:21] [गहरी सांस लेने की आवाज़]
[21:22] नन प्रश्न बस्ट जन के कॉमन आद आ नम्मा
[21:29] रियल लाइफ येलो आ रियल लाइफ अली मुच हो
[21:32] बिटदे आ नम्बा अनसर्टेनिटी
[21:38] केस विषय फाइनशियल स्टेटस आगिर अथवा बेरे
[21:43] फैमिली मैटर्स अली ई अनसर्टेनिटी
[21:47] इना हेगे दूर माद केबेको
[21:50] हां हां
[21:52] इ बरी नम कन्नडा चलन चित्र रंग मात्र इत
[21:58] प्रपंच प्रति क्षेत्र अनिश्चित अनुभव जना
[22:05] याला
[22:07] येो या दिन बदला प्रतिदिन बदला
[22:16] बदला
[22:18] परिस्थिति नली
[22:20] नमको
[22:23] नम्मा अंत इंट्यूशन डेवलप मार
[22:28] ध्यान होगा ये भया दूर अ
[22:35] आध्यात्मिक
[22:37] जनरा
[22:38] व
[22:41] आध्यात्म आत्म शक्ति आत्म
[22:47] तुम धन्यवाद
[22:52] [प्रशंसा]
[22:56] नमस्ते गुरुदेव नस अभिग्ना विश्वनाथ नानु
[22:59] एक्ट्रेस हागो क्रिमिनल लॉयर नन्ना प्रश्न
[23:04] नगिरो नोगो अथवा ट्रॉमागिंदा नान हे आ
[23:08] बरदु मोस्ट ऑफ द टाइम अ जोते बदना कल पटवी
[23:13] सो अना कंप्लीटली हेल माड़द एंड नान हील
[23:17] आगिनी
[23:20] सर जगह के बंद
[23:24] [हंसी]
[23:25] इंद
[23:33] बंद सुदर्शन क्रिया मा ध्यान माले अ
[23:38] कंप्लीट
[23:41] आि निम्ली य कंप्लीट हील नी ब योने नहीं
[23:47] मार
[23:49] थैंक यू
[23:52] नमस्ते गुरुदेव नसरु हमसा वशिष्ठा
[23:57] नानु कन्नड द्ली पडकास्ट कार्यक्रम नड इली
[24:00] आध्यात्मिक विचार बुक नवी
[24:04] इत्त न प्रश्न नम भगवान विष्णु भूम अवतार
[24:08] तगा रामगली अथवा कृष्ण
[24:12] गर्भदली जन्म धरारे अ नम देवी भूलोद अवतार
[24:17] पार्वतीगली राधेगली अथवा सीतेगली
[24:22] भूमि निकले अथवा नीर या
[24:30] कष्ट पट
[24:33] सीते या कष्ट पट प्रश्न अगा भगवता कृष्णा
[24:38] अगली अथवा रामा अगली भूलो अवतारा तालवागा
[24:44] जन्म ता मनुष्य गर्भ जन्म जन्म ता
[24:48] सीते आगली अथवा पार्वती आगली अथवा राधे
[24:51] अगली जन्म ताली बर अवतार दिकारे भूमिकारे
[24:56] अथवा राधे नीर सीते भूमि
[25:01] या सीते आ रुक्मणी राधे जन्म ताले बंद और
[25:09] परिवार
[25:11] बरसाना नली राधे जन्म ताल रुक्मणी
[25:14] रुक्मांग मगो
[25:17] सत्यभामा सत्यजीत मग ही हां सीते मात्रा
[25:23] और जनक ऋषि के भूमि
[25:29] पार्वती पर्वत राज कुमारी जन्म
[25:34] नम तिरुपति पद्मावती आकाश राज पुत्री जन्म
[25:40] क
[25:44] मुख्य
[25:46] सारांश
[25:47] ना
[25:49] या मनुष्य जीवन मनुष्य जन्म
[25:53] अली हलवार तरह
[25:56] समस्या
[26:00] आ समस्या
[26:03] आत्मविश्वास
[26:04] नग मुखसी
[26:07] व निदर्शन
[26:10] जीवन निम जीवन
[26:13] बंद
[26:15] नी
[26:17] घट्टरी भद्र निम्मा विश्वास भद्र वो संदेश
[26:24] धन्यवाद [प्रशंसा]
[26:28] नमस्ते गुरुजी नसर सृष्टि अता नानु कन्नडा
[26:32] कंटेंट क्रिएट मारतेनी मते सोशल मीडिया
[26:35] मैनेज मारतेनी नन्ना प्रश्न
[26:40] अर्ली स्टेज इताने फ्रेशर आगी जना जॉब
[26:44] सेगा
[26:46] रिसेंटली सेतारे और वु पुट ब्रेक तो बेको
[26:51] वकेशन हो मैनेजरियल पोजीशन सीनियर्स यू
[26:57] लेजी यूरी केसा मा इंटरेस्ट आसक्ति
[27:01] सो 100% ऑफ टाइम ना केसा ने माड़ी ग्रोथ
[27:05] सासदा इ व पु ब्रेक म वापस बंद केसा
[27:10] कंटिन्यू माडदा या माड़बे नम अर्ली स्टेज
[27:13] ऑफ़ करियर
[27:16] ब्रेक
[27:19] फ्रीक्वेंट ब्रेक
[27:22] त ब्रेक तो
[27:25] खंडिता
[27:29] उदाहरण निमारे ड्राइवर अथवा यार अ मसा
[27:44] या
[27:52] निम
[27:58] ना य फ्रीक्वेंट तो
[28:02] य रजा तो
[28:09] करियर
[28:11] नोट
[28:13] तो
[28:16] कंडिता
[28:18] धन्यवाद थैंक यू
[28:22] शुभ सायंकाल गुरुदेव भवदा चरणो मम आदर
[28:28] पूर्वकम नमस्कार मम नाम समष्टि गुरुग नानु
[28:32] वु संस्कृत कंटेंट क्रिएटर अ रीति संस्कृत
[28:36] बाइक राइडर्स क्लब क ना नड देवे गुरुग
[28:39] नंदु व्यक्तिगत प्रश्न
[28:43] टीम्ली केसा माडो नबे केसा तबा ओबे सिकटे
[28:49] मा मुर टीम तबा कष्टा ओबरे केसा मादा गुरु
[28:55] अ साफलते
[28:59] य बेरे लाभ ओरे केसा मा के लाभ टीम इन सास
[29:08] बो
[29:11] अभ्यास मारको इवागा व रिसर्च पेपर बरी ओरे
[29:16] कुतारे
[29:18] अ इंप्लीमेंट मार साइंटिस्ट
[29:21] ओरे मला आकाशना
[29:26] जना से मारता हलवा चंद्रयाना हो ये नाने
[29:32] माने डिजाइन मारने मारती इगे
[29:38] समाज या इम्लीमेंट मार
[29:42] टीम वर्क को मारले बे
[29:45] धन्यवाद
[29:49] नमस्कार गुरुजी नस डॉक्टर चेतना आर एस आई
[29:54] टेक अ प्राइ टू से नान इली न आयुर्वेद ना
[29:57] कलदिनी न मेडिकल स्कूलिंग कंप्लीट आगी
[30:00] इंट्यूशन कलनी एंड आल्सो आई हैव लर्न अ
[30:02] डांस एंड इनुंद सेकंड खुशी विचार नम राज्य
[30:06] के यप्पत वर्ष तुमता
[30:09] निमत वर्ष तुमता नम राज्य यत वर्ष ई वर्ष
[30:14] न प्रश्न गुरुजी वु इंटशन
[30:18] मेडिकल इशज़ एनते फिजिकल हेल्थ इशज़ आब
[30:22] मेंटल हेल्थ इशज़ आबद मेंटल हेल्थ एन
[30:26] इंट्यूशन गुणा मारदा मेंटल हेल्थ इशज़
[30:30] खंडित मार यस्टो जना नम काल ज्ञानी काल
[30:35] ज्ञानी एडल्ट्स और काल ज्ञानी हो कद मा
[30:42] तरह ब्लॉक हो डॉक्टर नो टेस्ट मार
[30:47] म चेक मार चेक मारते
[30:50] हागे
[30:52] सावि जन
[30:55] लाभ पड़ारे
[30:57] खंडिता इंट्यूशन
[31:00] सो नानु इंटशनिस्ट कड़ा सो नन कॉन्सर्टली
[31:04] ओपनिंग एक्ट मारता सो 99 कॉन्सर्ट्स पैन
[31:07] इंडिया
[31:08] इंटशन ओपनिंग एक्ट मानी इत न पेशेंट्स
[31:12] मोस्ट ऑफ द मेंटल हेल्थ इशू पेशेंट इंटशन
[31:14] मुंत म गुणा मानी बट नन के इन प्रश्न
[31:18] गुरुजी य इंटशन कंप्लीट आगी 100% कंफर्म
[31:24] स्ट्रांगते
[31:25] ध्याना मार
[31:27] ओके गुरुजी
[31:28] थैंक यू
[31:34] नमस्ते गुरु जी
[31:38] नस पिंद्रा ननु शिवगु नानु ट्रेवलर म
[31:41] इनफ्लुएंसर नन्ना प्रश्न निम
[31:45] नता अनुभव व प्रश्न
[31:48] कन्फ्यूजन माइंडसेट न या कन्फ्यूजन
[31:53] कन्फज न शर्ट
[31:57] वन शर्ट क्वालिटी प्राइसते फिटते
[32:02] या डांस को
[32:07] टैलेंट कन्फ्यूजनु
[32:12] नेगेटिव तो पॉजिटिव
[32:15] सस्प टाइम
[32:18] अभिवद्ध मार बट अवकाश
[32:23] लाइफ स्पल मार करियर विषय
[32:28] वस्त
[32:32] हो
[32:34] के माइंडसेट
[32:35] मेडिटेशन मारो मेडिटेशन तक्ष हो
[32:39] ओके धन्यवाद गुरु जीत्वाकांक्षा
[32:44] निम्मा इंट्यूशन मा अ केत्वाकांक्षी
[32:49] साइडो ध्यान मा आ बे नेमता
[32:58] गुरुदेव वी हैव सम क्वेश्चंस इन इंग्लिश
[33:00] बट बिफोर दैट वी लाइक टू वार्मली वेलकम द
[33:04] मेंसली टैलेंटेड एंड वर्सटाइल एक्टर शर्मन
[33:08] जोशी जी हुज रिमारकेबल परफॉर्मेंससेस हैव
[33:11] वन हार्ट्स अक्रॉस जनरेशंस इट इज अ
[33:14] प्रिविलेज टू हैव हिम विथ अस टुडे
[33:38] आज हमारे बीच शर्मन जोशी जी उपस्थित हैं
[33:41] जो बहुत ही टैलेंटेड एक्टर हैं। [प्रशंसा]
[34:06] नमस्कार
[34:08] गुरु जी आपके
[34:12] आश्रम में आने का मौका मिला मुझे आज और
[34:15] मेरे परिवार को
[34:18] तो मैं भगवान का बहुत शुक्रगुजार हूं और
[34:22] मैं चाहता हूं गुरुजी गुरु जी कि आपका
[34:24] आशीर्वाद
[34:25] मुझ पर हमेशा बना रहे और मैं चाहता हूं कि
[34:30] आइंदा से हम बार-बार आपके आश्रम पर आए आ
[34:35] सके [प्रशंसा] आपसे मिल सके आपसे चंद
[34:40] बातें कर सके
[34:42] एक बार फिर से बहुत-बहुत शुक्रिया आपका और
[34:45] आप सभी का धैर्य से मुझे सुना मुझे पब्लिक
[34:49] स्पीकिंग बहुत अच्छे से आती नहीं है बट
[34:51] गुरु जी ने कहा कि दो शब्द बोल दो तो
[34:54] हिम्मत करके बोल दिया है। गुरुजी
[34:56] बहुत-बहुत शुक्रिया। थैंक यू एवरीवन। थैंक
[34:58] यू। [प्रशंसा]
[35:08] थैंक यू शर्मा जी। वी वार्मली वेलकम
[35:11] मुफ्ती शमून कासमी जी चेयरमैन ऑफ द
[35:15] उत्तराखंड मद्रास एजुकेशन बोर्ड देहरादून
[35:19] उत्तराखंड।
[35:25] [प्रशंसा]
[36:01] परम आदरणीय
[36:06] गुरु जी
[36:11] पूरी पूरी दुनिया को
[36:16] स्वस्थ
[36:17] और नेक
[36:20] और मानवता के सूत्र में बांधने वाले हमारे
[36:24] गुरु जी
[36:27] मैं आपके सानिध्य में
[36:31] यह कहना चाहता हूं
[36:34] कि संसार का पहला
[36:37] ग्रंथ वेद है।
[36:41] और अंतिम वाणी कुरान है और दोनों का मूल
[36:44] एक है।
[36:47] एकम एवं अदुत्यम
[36:51] ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मद रसूल्लाह वन
[36:53] गॉड विदाउट सेकंड अवल अल्लाह नूर उपाय
[36:56] कुदरत के सब बंदे एक ही नूर से सब जग उपजे
[37:00] कौन भले कौन बंदे
[37:07] कुरान कहता है यानास
[37:11] इन खसा
[37:14] ऐ लोगों हमने तुम्हें एक ही नरो नारी से
[37:17] पैदा किया है। हमारे दूध और खून के रिश्ते
[37:19] हैं। और उन दूध खून के रिश्तों की
[37:21] पवित्रता को अगर कोई समझता है तो हमारे
[37:25] गुरु जी गुरुदेव ने समझा है। और उन दूध
[37:28] खून के रिश्तों की
[37:30] सुरक्षा के लिए और हिफाजत के लिए पूरे
[37:33] विश्व के अंदर अगर किसी ने काम किया है उन
[37:37] महापुरुषों
[37:39] वाला जो काम किया है वह गुरुदेव ने किया
[37:41] है। मैं उत्तराखंड राज्य से
[37:45] अपने राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री
[37:48] पुष्कर सिंह धामी जी की जानिब से
[37:52] आदरणीय गुरुदेव जी को उनके 70वें वर्षगांठ
[37:57] और उनके संगठन आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें
[38:01] वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करता
[38:04] हूं और गुरु जी बताना चाहता हूं कि
[38:07] उत्तराखंड राज्य की सरकार और उत्तराखंड
[38:09] राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर
[38:12] सिंह धामी जी आपके वह स्वयं आते आपके चरण
[38:17] स्पर्श करते मगर क्योंकि शासकीय मजबूर
[38:20] शासकीय मजबूरियां होती है व्यवस्था होती
[38:23] है उसके कारण वह स्वयं नहीं आ सके मुझे
[38:26] उन्हें
[38:28] यह आदेश दिया और मुझे आपकी सेवा में भेजा
[38:32] और मेरा भी यह मन था कि गुरु जी आपने
[38:34] क्योंकि मुझे भी आमंत्र आमंत्रित करके
[38:38] बुलाया ये मेरे मेरे लिए सौभाग्य की बात
[38:41] है कि मैं अपने गुरुदेव के सानिध्य में
[38:44] आकर के एक ऐसे उत्तराखंड राज्य के यशस्वी
[38:48] मुख्यमंत्री का मैसेज लेकर के मैं आपके
[38:51] बीच में आया हूं जो देवभूमि उत्तराखंड
[38:55] राज्य जो पूरे विश्व को पूरे देश का एक
[38:59] मुख मुकुट की हैसियत से है और हमारी सरकार
[39:02] और हमारी सरकार के माननीय मुख्यमंत्री
[39:04] पुष्कर सिंह धामी जी निरंतर रात दिन मेहनत
[39:08] करके पूरे देश के लोग हमारे हमारे
[39:10] उत्तराखंड जाते हैं। गुरुदेव का आश्रम भी
[39:12] वहां स्थित है और गुरुदेव जाते रहते हैं।
[39:16] मैं गुरुदेव को मुबारकबाद देते हुए
[39:18] जन्मदिन की उनसे कहना चाहता हूं कि
[39:21] गुरुदेव जहां आप पूरे विश्व को इंसानियत
[39:24] का सबक सिखाते हैं, पढ़ाते हैं और उन्हें
[39:29] एक अच्छे रास्ते पर लाते हैं। मैं आपसे
[39:32] कहना चाहूंगा कि देवभूमि आपका आपके स्वागत
[39:35] के लिए आपको एस ए मुख्य आपको यानी राज्य
[39:40] के अतिथि की हैसियत से मैं आपको चाहूंगा
[39:42] कि आप उत्तराखंड राज्य में अपना अपने चरण
[39:46] इस आपके चरण वहां पहुंचेंगे तो मैं समझता
[39:48] हूं कि उत्तराखंड राज्य के अंदर जो विकास
[39:51] हुआ है और देश के प्रधानमंत्री श्री
[39:53] नरेंद्र मोदी जी ने जो एक पूरे देश को एक
[39:56] सूत्र में बांधा है सबका साथ सबका विकास
[39:58] और सबका विश्वास और सबका प्रयास तो
[40:00] गुरुदेव आपका जो मिशन है कि हर चेहरे पर
[40:04] मुस्कान हो, हर घर खुशहाल हो। यह आपका
[40:07] मिशन आगे बढ़ेगा। मैं आपको बताना चाहता
[40:10] हूं जनमानस को कि गुरुदेव से मेरी पहली
[40:13] मुलाकात 2002 में ताल कटोरा स्टेडियम में
[40:17] हुई और यही शब्द मेरे थे कि गुरु जी क्या
[40:20] हमारे दूध और खून के रिश्ते नहीं है? तो
[40:22] उस वक्त गुरु जी ने यह कहा निसंदेह हमारे
[40:25] दूध और खून के रिश्ते हैं। [प्रशंसा]
[40:30] मैं 2002 से फिर 2005 में गुरुजी ने मुझे
[40:35] बुलाया। फिर 2006 में बुलाया और 2008 में
[40:38] मैं भाग्यशाली हूं कि मैंने आर्ट ऑफ
[40:41] लिविंग के टीचिंग का पूरा कोर्स करके
[40:44] मैंने उस सुदर्शन क्रिया के जो जो सुदर्शन
[40:48] क्रिया की ताकत है उसके अंदर जो जो एक
[40:52] रूहानियत है उसे मैंने महसूस किया और
[40:55] विश्व भर के लोगों का मेरे पास फोन आता है
[40:57] गुरुजी वो मुझसे पूछते हैं कि आप आर्ट ऑफ
[40:59] लिविंग के टीचर हैं। तो मैं फक्र के साथ
[41:02] कहता हूं कि मैं आर्ट ऑफ लिविंग का टीचर
[41:04] हूं और गुरु जी मेरे गुरुदेव हैं। उनसे
[41:07] मैं [प्रशंसा] जब मैं उनसे यह कहता हूं कि
[41:10] एक बार सुदर्शन क्रिया का सुदर्शन क्रिया
[41:14] का एक बार आप एक बार करके देखिए आपको जीवन
[41:18] में आपको आप आनंदित हो जाएंगे। तो गुरुदेव
[41:20] एक तो मैं चाहता हूं कि आपकी सुदर्शन
[41:22] क्रिया हमारे उत्तराखंड के अंदर स्वयं जब
[41:25] आप कराएंगे तो वहां अलग ही एक वातावरण बन
[41:28] जाएगा। तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि आज
[41:31] तक मेरा गुरु जी से जब से मुझे वह मिले
[41:33] हैं तब से मेरा निरंतर उनसे ताल्लुक बना
[41:36] हुआ है। मैं आज यह देखता हूं कि गुरु जी
[41:38] ने हर वर्ग के लोगों को अलग-अलग तरह के
[41:41] लोगों को बुलाया। हम सरमन जोशी को सुना
[41:44] करते थे, देखा करते थे। आज यहां देख के तो
[41:47] गुरु जी के यहां तो हीरो हो, नेता हो,
[41:49] अभिनेता हो, सब के सब सब के सब उनके लिए
[41:53] एक हैं। एक समान है और पूरे विश्व को वो
[41:56] शांति में देखना चाहते हैं और हम सबका यह
[41:58] फर्ज है कि हम गुरु जी को सपोर्ट करें और
[42:01] गुरु जी के इस मिशन को आगे बढ़ाएं। तो
[42:03] गुरुदेव मैं आपसे एक बात और कहना चाहता
[42:06] हूं कि उत्तराखंड के अंदर हमने एक बहुत
[42:08] बड़ा काम माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह
[42:10] धामी जी के नेतृत्व में किया है कि मदरसों
[42:13] में पढ़ने वाले बच्चे सिर्फ धार्मिक
[42:15] एजुकेशन हासिल करते थे। आज हमारे माननीय
[42:18] मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी आपसे
[42:20] प्रेरणा लेकर के उन्होंने मदरसों को
[42:22] आधुनिक बना के इंजीनियर और डॉक्टर बनने का
[42:25] रास्ता प्रस्तुत किया है। मैं आपको इसलिए
[42:28] ये बात कहना चाह रहा हूं कि आप जो आपका जो
[42:31] मिशन है आप सबको जोड़ना चाहते हैं। आप
[42:34] देवबंद हो, बरेली हो, आप लखनऊ हो, दुनिया
[42:37] के किसी भी किसी भी धर्म के मानने वाले
[42:40] हो। आप सबको एक जगह लाकर के कहते हैं
[42:42] वसुदेव कुटुंबकम।
[42:44] [प्रशंसा]
[42:45] वसुदेव कुटुंबकम अल खान्लाह
[42:48] बस इतना कहना चाहूंगा अंत में कि जबान यार
[42:52] मन तुर्की के मन तुर्की नमीदानम मेरे यार
[42:55] की जबान तुर्की है और मैं तुर्की नहीं
[42:56] जानता हूं। 2005 में जब आने के बाद हमने
[43:00] यहां के विद्वानों को बुलाया तो आने के
[43:02] बाद उन मुस्लिम लीडर्स ने मुस्लिम
[43:05] विद्वानों ने एक बात कही कि हमें तो पता
[43:07] ही नहीं था कि ये आश्रम ऐसा है कि जो
[43:09] इंसानियत के लिए काम करता है। बस बात इतनी
[43:12] है बात इतनी है कि हमें अपनी दूरियों को
[43:14] कम करना चाहिए। हमें दूरियों को कम करना
[43:17] चाहिए और हमारे बीच में एक ऐसे महापुरुष
[43:21] ईश्वर का प्रसाद है गुरुदेव कि उन्होंने
[43:24] आकर के सारे लोगों से कहा कि तुम में ना
[43:27] कोई छोटा है ना बड़ा है। ना कोई नीच है ना
[43:31] ऊंच है। तुम सब एक मां-बाप की संतान हो।
[43:33] तो गुरुदेव हमारे लिए तो प्रसाद है। मैं
[43:35] गुरुदेव आपको आपके इस मिशन के लिए किसी भी
[43:39] जगह कहीं भी पूरे विश्व के अंदर जहां भी
[43:42] जरूरत होगी और पूरी सरकार मैं समझता हूं
[43:44] सरकारों का काम आप कर रहे हैं। सरकारों को
[43:47] तो आपका काम करना चाहिए और आपको अंत में
[43:50] एक बात कहना चाहूंगा। जनमानस से बताना
[43:51] चाहूंगा। मेरी एक पीड़ा थी कि जब गुरुदेव
[43:54] ने दिल्ली के अंदर प्रोग्राम कराया। तमाम
[43:58] लोगों को बुलाया यमुना के किनारे पर। उस
[44:01] यमुना के किनारे पर लोगों ने कहा कि यह तो
[44:05] यहां एनवायरमेंट की हानि हो गई। तो
[44:07] गुरुदेव का बड़ा दिल देखिए। गुरुदेव ने
[44:10] कहा कि अगर अगर मेरे देश के लिए अगर आप ये
[44:13] समझते जबकि ये गलत है आपका नजरिया। आज
[44:16] सुप्रीम कोर्ट ने ये कह कर के गुरुदेव का
[44:19] सम्मान किया। उनकी इज्जत की और हमारा सीना
[44:22] भी फक्र से चौड़ा हो गया कि हम तो
[44:24] इंसानियत के लिए काम करते हैं। कहीं
[44:26] एनवायरमेंट का हम नुकसान कर सकते हैं और
[44:28] गुरुदेव का तो पूरा जीवन इससे भरा पड़ा
[44:30] है। मैं गुरुदेव के बारे में बहुत सारी
[44:32] बातें कह सकता हूं। मैं मैं तो गुरुदेव से
[44:35] बस इतना चाहूंगा कि आपका आपका आशीर्वाद
[44:37] हमें मिलता रहे। और सरकारों को आपका
[44:40] आशीर्वाद मिलता रहे। ताकि सरकार आम जनमानस
[44:43] के लिए अच्छा कार्य करें और अंत में एक बस
[44:45] मेरी यह ख्वाहिश है के गुरु जी को इनकी
[44:48] जरूरत नहीं है। मैं ये मेरा अपना वो है।
[44:51] गुरुजी विश्व रत्न है।
[44:54] गुरु जी भारत रत्न है।
[44:58] मगर मेरा सरकार से विनरम
[45:02] मेरा अनुरोध है कि गुरु जी नोबेल प्राइज
[45:06] से भी ऊपर हैं।
[45:08] आप सब एक आखिर में ये कहें कि हम देश के
[45:12] प्रधानमंत्री से मैं विनरम अपील करता हूं
[45:15] कि गुरुदेव को सम्मान की जरूरत नहीं है
[45:17] मगर मैं चाहता हूं कि गुरुदेव का नाम जाना
[45:20] चाहिए अमन के लिए भाईचारे के लिए और
[45:23] इंसानों के तमाम जितनी भी बुराइयां हो
[45:25] सकती है उन सब के खिलाफ अगर कोई काम कर
[45:27] रहा है विश्व के अंदर सबसे बड़ा संगठन है
[45:30] तो वो आर्ट ऑफ लिविंग ही है गुरु जी का यह
[45:32] अधिकार है और हम ये चाहते हैं अपनी सरकार
[45:35] से कि गुरुदेव के गुरुदेव को जैसे डॉक्टर
[45:38] डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को उनके कार्यों
[45:40] के लिए आपने भारत रत्न दिया। हम गुरु जी
[45:42] को चाहते हैं कि गुरु जी का यह अधिकार है
[45:44] और हम सब की ये ख्वाहिश है इस सम्मान से
[45:47] सुज्जित होने चाहिए गुरुदेव अंदाज बयां
[45:50] अगरचे बहुत शोक नहीं है शायद के उतर जाए
[45:53] तेरे दिल में मेरी बात जय हिंद जय भारत जय
[45:56] गुरुदेव
[45:58] आपके स्नेह पूर्ण शुभकामना के लिए हार्दिक
[46:01] धन्यवाद
[46:04] नहीं नहीं बहुत अच्छा बहुत बढ़िया जोश भर
[46:07] दिया आपने बड़ा
[46:09] [प्रशंसा]
[46:15] अभी तीन तो म्यूजिक कार्यक्रम है अभी तो
[46:19] उससे पहले ध्यान कर लेते हैं तो सभी लोग
[46:24] बैठ जाइए 10 मिनट हम लोग अभी ध्यान करें
[46:27] जहां है वहीं बैठ जाओ
[46:31] 10 मिनट्स वी विल मेडिटेट
[46:34] कूद को निम्ला मेडिटेशन मारना मुझे पता है
[46:39] मुझे मुझे मिलने के लिए अभी से वहां क्यों
[46:41] लग रहे हैं? आप वहां नहीं जाओगे। अभी मैं
[46:45] इधर से जाने वाला हूं।
[46:50] तो वहां पहले से बैठने खड़े होने की जरूरत
[46:53] नहीं। घंटों खड़े रहते हो भाई। ये नहीं
[46:56] करना। आप लोग बैठ जाओ। थोड़ा ध्यान करो।
[46:58] ये ध्यान में हम मिलते ही हैं आप सबको।
[47:02] हां आराम से बैठ जाओ। आराम कद
[47:07] निम ध्यान
[47:09] अ नंत
[47:11] इत म्यूजिक
[47:14] म्यूजिक यार
[47:19] नम्मा
[47:21] गुरुदेव वी विल नाउ हैव लेटर ऑन अ लाइव
[47:24] परफॉर्मेंस बाय रनोन बिहारी फोक सिंगर
[47:27] सत्येंद्र कुमार संगीत जी
[47:31] फोक सिंगर
[47:34] बिहार के बहुत सुप्रसिद्ध
[47:38] जनपद
[47:39] गायक गाने वाले हैं और
[47:43] वी विल आल्सो हैव अनदर लाइव परफॉर्मेंस
[47:46] बाय श्रद्धा जी अ वेरी पॉपुलर इंडियन
[47:49] वोकलिस्ट फ्रॉम उत्तराखंड
[47:51] उत्तराखंड से भी गाना श्रद्धा जी गाएगी और
[47:56] आफ्टर दैट वी विल आल्सो हैव अ लाइव
[47:58] परफॉर्मेंस बाय रनोन तमिल सिंगर नरेश
[48:01] अय्यर जी
[48:02] नरेश अय्यर इन्होंने 2000 से अधिक मूवी
[48:07] में
[48:08] चित्रों में गाया है।
[48:11] सिनेमा में गाया है। वह भी 2000 से अधिक
[48:16] गाना गाया। वो भी बहुत अच्छा गाते हैं। ये
[48:18] तीनों गाना हम सुनेंगे। पहले ध्यान क्या
[48:22] ज्ञान हो गया। फिर गा ध्यान उसके आखरी में
[48:28] गान।
[48:30] सब बैठ